हजारीबाग: चरही के असली ‘थानेदार’ हैं नन्हे हनुमान, घाटी को “फूलों की घाटी” बनाने की तैयारी

Hazaribagh: चरही घाटी की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र “नन्हे हनुमान मंदिर” अब एक नए स्वरूप में निखरने को तैयार...

Hazaribagh: चरही घाटी की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र “नन्हे हनुमान मंदिर” अब एक नए स्वरूप में निखरने को तैयार है. इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां के अध्यक्ष स्वयं चरही थाना के थाना प्रभारी होते हैं.

स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि घाटी के रक्षक और असली थानेदार “नन्हे हनुमान” ही हैं. इसी कड़ी में हजारीबाग महापौर अरविंद राणा ने चरही थाना प्रभारी अजीत कुमार से मुलाकात कर मंदिर के विकास और घाटी के सुंदरीकरण पर विस्तृत चर्चा की.

50 वर्षों से आस्था और सुरक्षा का प्रतीक

बताया जाता है कि करीब 50 साल पहले घाटी में होने वाली भीषण सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से इस मंदिर की स्थापना की गई थी. तब से आज तक थाना परिवार ही यहां की जिम्मेदारी संभालता है और हर मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

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चरही घाटी बनेगी “फूलों की घाटी”

चर्चा के दौरान महापौर ने थाना प्रभारी को अवगत कराया कि चरही घाटी को “फूलों की घाटी” के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग और हजारीबाग उपायुक्त को पत्र दिया गया है. महापौर की ओर से भी सकारात्मक पहल की जानकारी दी गई. यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो चरही घाटी न केवल सुरक्षित होगी बल्कि झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो जाएगी.

रौशनी और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर

बैठक में मंदिर क्षेत्र के 600 मीटर दायरे में बिजली के पोल और लाइट की कमी का मुद्दा भी उठाया गया. यहां प्रकाश व्यवस्था होने से रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी. श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर उत्साह है कि मंदिर में फिर से साफ-सफाई, नियमित कीर्तन और व्यवस्थित पूजा शुरू हो गई है.

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