रांची: रांची विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई कुलपति नियुक्ति और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन को लेकर विरोध तेज हो गया है. आदिवासी छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय में छात्रों, आदिवासियों और दलित समाज की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है.
प्रोफेसर सरोज शर्मा की नियुक्ति का विरोध
संघ ने कुलपति प्रोफेसर सरोज शर्मा की नियुक्ति का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में NIOS की चेयरपर्सन रहते हुए उन पर एक दलित स्टाफ ड्राइवर को आत्महत्या के लिए उकसाने और जातीय प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगा था. संगठन का कहना है कि इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा FIR संख्या 863/2024 दर्ज की गई थी. आदिवासी छात्र संघ ने कहा कि ऐसे विवादों में घिरे व्यक्ति को रांची विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान का प्रमुख बनाना झारखंड की अस्मिता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है.

‘झारखंड की अस्मिता के खिलाफ फैसला’
संगठन ने विश्वविद्यालय में चल रही पदों के पुनर्गठन (Restructuring) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. संघ का आरोप है कि संकल्प संख्या 902 के तहत की जा रही प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं और इसमें आरक्षण नियमों तथा छात्रों की वास्तविक संख्या की अनदेखी की जा रही है. छात्र संघ ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं हो रही और इससे छात्र हित प्रभावित हो सकते हैं.
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राज्यपाल से नियुक्ति रद्द करने की मांग
आदिवासी छात्र संघ ने राज्यपाल सह कुलाधिपति से मांग की है कि प्रोफेसर सरोज शर्मा की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए. साथ ही विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर नियुक्ति और पुनर्गठन की प्रक्रिया को भी छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए निरस्त किया जाए.
