Hazaribagh: हजारीबाग के प्रसिद्ध पंचमंदिर में पूजा-अर्चना और आमलोगों के प्रवेश को लेकर दायर मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत के कड़े रुख के बाद याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि मंदिर को आमलोगों के लिए बंद नहीं किया जाएगा. हाईकोर्ट के 17 अगस्त 2026 के आदेश में इस आश्वासन को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है.

मंदिर में ताला लगाए जाने की बात पर अदालत ने जताई नाराजगी
न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में रिट याचिका संख्या 3244/2025, प्रदीप कुमार एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य मामले की सुनवाई हुई. इसी मामले से संबंधित अवमानना वाद संख्या 1398/2025 भी सुनवाई में शामिल है. सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता नीलेंदु जयपुरियार की ओर से अधिवक्ता अवनीश रंजन ने अदालत को बताया कि मंदिर को लॉक कर दिया गया है.
इस पर अदालत के रुख के बाद याचिकाकर्ता की ओर से आश्वासन दिया गया कि मंदिर आमलोगों के लिए बंद नहीं होगा और श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे. अदालत के आदेश में इस आश्वासन को स्पष्ट तौर पर दर्ज किया गया है.
दोनों मामलों को एक साथ सुनने का निर्देश
अदालत ने दोनों मामलों को ‘प्रवेश’ शीर्षक के तहत सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है. वहीं, मामले में हस्तक्षेप के लिए दाखिल आवेदन की सुनवाई भी मुख्य याचिका के साथ करने की बात आदेश में कही गई है. इससे मंदिर से जुड़े विवाद की आगे की सुनवाई मुख्य मामले के क्रम में ही होगी.
अगली सुनवाई मुख्य याचिका के साथ
हाईकोर्ट के आदेश पर न्यायमूर्ति आनंद सेन के हस्ताक्षर हैं और आदेश की तारीख 17 अगस्त 2026 है. अब हस्तक्षेप आवेदन समेत संबंधित मुद्दों पर आगे की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ होगी.
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार के साथ अधिवक्ता राहुल लांबा, कनु प्रिया और अनिश कमल उपस्थित थे. राज्य की ओर से अभिजीत आनंद तथा प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता भारत कुमार ने पक्ष रखा. वहीं, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा.

