Hazaribagh : बरही प्रखंड अंतर्गत खोड़ाहर पंचायत में ऐतिहासिक जन्नी शिकार का भव्य आयोजन किया गया. जन्नी शिकार में खोड़ाहार, कुंडवा और दौरवा गांव की महिलाएं शामिल हुई. इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं ने उत्साह, अनुशासन और साहस के साथ पारंपरिक शिकार अभियान में भाग लिया. यह आयोजन 17वीं सदी में रोहतासगढ़ की रक्षा के लिए मुगलों के खिलाफ लड़ी गई आदिवासी महिलाओं की वीरता और बलिदान की स्मृति को जीवंत करने का प्रतीक है. आदिवासी संगठन समिति के अध्यक्ष सह सेवानिवृत्त रेंज ऑफिसर दिलीप एक्का ने बताया कि जन्नी शिकार की परंपरा प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित की जाती है. उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व के दौरान मुगलों के हमले के समय आदिवासी महिलाओं ने पुरुषों का वेश धारण कर दो दिनों तक युद्ध करते हुए दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया था. जो वीरता का अद्भुत उदाहरण है.
हथियारों के साथ जंगल भ्रमण
समिति के सचिव सुनील टोप्पो ने कहा कि यह परंपरा आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का सशक्त प्रतीक है. सुबह से देर रात तक चले इस आयोजन में महिलाओं ने पारंपरिक हथियारों के साथ जंगलों में भ्रमण कर अभियान को सफल बनाया. कार्यक्रम का विशेष आकर्षण इसका सामूहिक स्वरूप रहा. समापन के बाद सभी महिलाओं ने एक साथ भोजन कर सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया.

आदिवासी परंपरा संरक्षण पर जोर
आयोजन को सफल बनाने में पूनम कच्छप, अनीता कुजूर, मगदली बाड़ा, पार्वती देवी, नथुनी देवी, रीना कुजूर, बसंती तिर्की, सरिता तिर्की, लक्ष्मी कुमारी, मंजू देवी, मुन्नी देवी, अनिता केरकेट्टा, सुमी तिर्की, नंदिया तिर्की सहित बड़ी संख्या में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही. मौके पर भाजपा नेता सह सांसद प्रतिनिधि रंजीत चंद्रवंशी, अध्यक्ष दिलीप एक्का, सचिव सुनील टोप्पो, कोषाध्यक्ष अशोक बाड़ा, उपाध्यक्ष अंजुलियस एक्का, कमेल टोप्पो, जगदीश उरांव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. सभी ने आदिवासी परंपरा के संरक्षण एवं इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया.
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