रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी असम यात्रा के दौरान मंगलवार को आस्था और संकल्प का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया.गुवाहाटी स्थित सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर की चौखट पर माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री ने न केवल आध्यात्मिक आशीर्वाद लिया, बल्कि असम की वीर भूमि से आदिवासी और वंचित समाज के हक-अधिकारों की रक्षा का एक बुलंद संदेश भी दिया.
आध्यात्मिक शांति और लोक-कल्याण की कामना
मुख्यमंत्री ने मां कामाख्या के पावन धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की.इस दौरान उन्होंने झारखंड सहित पूरे देश की सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की.दर्शन के बाद भावुक होते हुए सीएम ने कहा,मां कामाख्या के चरणों में शीश नवाकर मन को असीम शांति मिली है.मां सभी का कल्याण करें और हम सबको एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएं.

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असम के प्यार से अभिभूत हुए सीएम
मंदिर दर्शन के पश्चात असम की जनता से मिले अपार स्नेह पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्रांतिकारी भूमि के बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों से जो आशीर्वाद मिला है, उससे वह पूरी तरह अभिभूत हैं.उन्होंने जनता के इस अटूट विश्वास और प्रेम को अपनी असली ताकत बताया.
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तीर-धनुष का संकल्प: शोषितों के लिए एकजुटता
अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा केवल एक दल नहीं, बल्कि शोषितों और आदिवासियों की आवाज है.उन्होंने जोर देकर कहा की जेएमएम हर शोषित और वंचित व्यक्ति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. तीर-धनुष का हमारा संकल्प समाज के अंतिम व्यक्ति को उसका अधिकार दिलाने तक जारी रहेगा.




