Ranchi: झारखंड में अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन और पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स के खिलाफ झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अब मनमर्जी का निर्माण नहीं चलेगा. अगर तय समय सीमा के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी और प्रोजेक्ट्स को सील भी किया जा सकता है.

लापरवाह डेवलपर्स को अंतिम चेतावनी
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी द्वारा जारी एक सख्त आधिकारिक नोटिस में सभी भवन निर्माण, टाउनशिप और एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है. बोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में आदेश दिया है कि हर हाल में स्थापना सहमति (सीटीइ) और संचालन सहमति (सीटीओ) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दें.
इन प्रोजेक्ट्स पर कसेगा शिकंजा, समझें नियम और पैमाना
- बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स (कटेगरी 8-ए): जिनका बिल्ट-अप एरिया 20,000 वर्ग मीटर से अधिक और 1,50,000 वर्ग मीटर से कम है. इन्हें सिया से पर्यावरण स्वीकृति लेनी होगी.
- टाउनशिप और बड़े एरिया प्रोजेक्ट्स (कटेगरी-8-बी ): 50 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र वाले, या 1,50,000 वर्ग मीटर से अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले प्रोजेक्ट्स.
- ऑरेंज कैटेगरी (कटेगरी 10.1): 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले प्रोजेक्ट्स, जिन्हें झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना सहमति (सीटीइ) और संचालन सहमति (सीटीओ)लेना अनिवार्य है.
- ग्रीन कैटेगरी (कटेगरी 10.2): 5,000 वर्ग मीटर से लेकर 20,000 वर्ग मीटर तक के छोटे व मंझोले प्रोजेक्ट्स भी अब इस दायरे में हैं.
