Hazaribagh: शहर में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के दौरान सट्टेबाजी का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आ रही है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह अवैध कारोबार रोजाना करोड़ों रुपये का लेन-देन कर रहा है और हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ पुलिस की नजर के सामने ही संचालित हो रहा है.
बाहर बैठे आका, शहर में फैला जाल
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन झारखंड से बाहर बैठे बड़े सट्टेबाजों के हाथ में है. ये आका डिजिटल माध्यमों और स्थानीय एजेंटों के जरिए हजारीबाग में अपना जाल फैलाए हुए हैं. बताया जाता है कि ये लोग खुलेआम यह दावा करते हैं कि उन्होंने ऊपर तक सेटिंग कर रखी है, जिससे उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है.
युवाओं को बना रहे मोहरा
सूत्रों के मुताबिक, सट्टे के दलाल शहर के युवाओं को लालच और जल्दी पैसा कमाने के झांसे में फंसा रहे हैं. शुरुआत छोटे दांव से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत बन जाती है. कई मामलों में युवाओं ने अपनी जमापूंजी गंवा दी, वहीं कुछ ने कर्ज लेकर भी सट्टा खेला और अब वे आर्थिक संकट में फंस चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि दलाल इन युवाओं से लगातार पैसे वसूलने के लिए मानसिक दबाव भी बनाते हैं.
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स्थानीय युवकों से कराई जा रही वसूली
सूत्रों के अनुसार, सट्टेबाजी के पैसे की वसूली के लिए शहर के ही कुछ युवकों को लगाया गया है. ये लोग सट्टा खेलने वालों के घर तक पहुंचकर पैसा वसूलते हैं और कई बार डराने-धमकाने की भी बात सामने आती है. इससे शहर में एक तरह का खौफ का माहौल बनता जा रहा है.
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. न तो बड़े स्तर पर छापेमारी होती है और न ही नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश दिखती है. यह भी आरोप है कि कुछ लोग पुलिस के नाम का इस्तेमाल कर सट्टेबाजों और दलालों से पैसे वसूल रहे हैं. इस वजह से असली अपराधी बच निकलते हैं और उनका मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है.
समाज और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा
कानून के मुताबिक सट्टेबाजी एक दंडनीय अपराध है, लेकिन हजारीबाग में यह कारोबार बेखौफ जारी है. यदि सूत्रों के दावे सही हैं, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा खतरा भी है, जहां युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है. हजारीबाग में आईपीएल सट्टेबाजी का यह नेटवर्क अब एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है. सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी कई गंभीर सवाल खड़े करती है. क्या वाकई इस पूरे खेल पर किसी का संरक्षण है? और अगर हां, तो कार्रवाई कब होगी? अब नजर प्रशासन और पुलिस पर है कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं—सख्ती या फिर खामोशी.
