चाईबासा: बाईपास चौक प्रतिमा विवाद में कांग्रेस बोली, ग्रामसभा का निर्णय और शिबू सोरेन का सम्मान दोनों सर्वोपरि

Chaibasa: बाईपास चौक पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर जारी विवाद पर जिला कांग्रेस कमेटी,...

Chaibasa: बाईपास चौक पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर जारी विवाद पर जिला कांग्रेस कमेटी, पश्चिमी सिंहभूम ने रविवार को अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस ने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत ग्रामसभा के निर्णयों का पूर्ण सम्मान होना चाहिए, वहीं झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन के ऐतिहासिक योगदान को भी सर्वोपरि माना जाना चाहिए.

ग्रामसभा स्थानीय स्वशासन की सबसे मजबूत इकाई : रंजन बोयपाई

कांग्रेस जिलाध्यक्ष रंजन बोयपाई ने बयान जारी कर कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा केवल औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन, जनभागीदारी और लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे मजबूत इकाई है. उन्होंने कहा कि यदि ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से कोई निर्णय लिया है, तो उसका सम्मान सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को करना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि किसी सार्वजनिक स्थान पर निर्माण कार्य, प्रतिमा स्थापना या अन्य विकास कार्यों से पहले संबंधित ग्रामसभा की सहमति प्राप्त करना और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है.

शिबू सोरेन के योगदान को बताया ऐतिहासिक

रंजन बोयपाई ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के अग्रदूत रहे हैं. जल, जंगल, जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए उनके संघर्षों को कांग्रेस पार्टी पूर्ण सम्मान देती है और उनके योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता.

“ग्रामसभा बनाम गुरुजी” नहीं है यह मुद्दा : त्रिशानु राय

जिला कांग्रेस प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि यह विषय किसी भी स्थिति में “ग्रामसभा बनाम गुरुजी” का नहीं है. कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि ग्रामसभा का निर्णय भी सर्वोपरि है और गुरुजी का सम्मान भी सर्वोपरि है. इन दोनों का सम्मान संविधान, लोकतंत्र और झारखंड की सांस्कृतिक अस्मिता के अनुरूप किया जाना चाहिए.

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील

कांग्रेस नेताओं ने सभी पक्षों से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप न दिया जाए. उन्होंने कहा कि आपसी संवाद, सहमति और संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से ही समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द, भाईचारा और झारखंड की गौरवशाली परंपरा बनी रहे.
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