चाईबासा: योग से बदली प्रेमलता की जिंदगी, हाइपरथायरॉइडिज्म के लक्षणों पर पाया नियंत्रण

Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड के लोवाहातु गांव की 35 वर्षीय प्रेमलता सामद ने नियमित योगाभ्यास, संतुलित जीवनशैली और चिकित्सकीय...

Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड के लोवाहातु गांव की 35 वर्षीय प्रेमलता सामद ने नियमित योगाभ्यास, संतुलित जीवनशैली और चिकित्सकीय उपचार के समन्वय से हाइपरथायरॉइडिज्म के लक्षणों पर प्रभावी नियंत्रण पाया है. उनकी यह सफलता अब जिले में स्वास्थ्य जागरूकता का प्रेरक उदाहरण बन रही है.

बीमारी के कारण प्रभावित हुआ सामान्य जीवन

प्रेमलता ने बताया कि बीमारी के दौरान उन्हें लगातार घबराहट, बेचैनी, अनिद्रा, अत्यधिक थकान और वजन घटने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. इन लक्षणों के कारण उनका सामान्य जीवन काफी प्रभावित हो गया था. इसके बाद उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, तांतनगर में योग प्रशिक्षक सपना देवगम से संपर्क किया.

योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में शुरू किया अभ्यास

योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में प्रेमलता ने सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, मत्स्यासन, भुजंगासन, मकरासन और शवासन सहित कई योगासनों का नियमित अभ्यास शुरू किया. इसके साथ ही उन्होंने अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जायी और नाड़ी शोधन जैसे प्राणायाम भी किए. उन्होंने चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होम्योपैथिक उपचार, संतुलित आहार और तनावमुक्त जीवनशैली भी अपनाई.

कुछ महीनों में दिखने लगा सकारात्मक बदलाव

करीब दो से तीन महीने के नियमित अभ्यास के बाद उनकी घबराहट, बेचैनी और अनिद्रा में सुधार आने लगा. वहीं लगभग छह माह के लगातार योगाभ्यास के बाद हाइपरथायरॉइडिज्म से जुड़े अधिकांश लक्षण काफी हद तक नियंत्रित हो गए.वर्तमान में प्रेमलता पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ, ऊर्जावान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रही हैं.

योग उपचार का सहयोगी माध्यम : सपना देवगम

योग प्रशिक्षक सपना देवगम ने कहा कि योग किसी भी बीमारी के उपचार का विकल्प नहीं है, बल्कि चिकित्सकीय उपचार के प्रभाव को बढ़ाने वाला सहयोगी माध्यम है. नियमित योग, प्राणायाम और संतुलित जीवनशैली अपनाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखा जा सकता है.

उपायुक्त ने योग को बताया वैज्ञानिक आधार

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि योग स्वस्थ जीवन का वैज्ञानिक आधार है और जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव का प्रभावी माध्यम भी है. उन्होंने जिलेवासियों से प्रतिदिन योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की.

स्वास्थ्य जागरूकता का प्रेरक उदाहरण बनी कहानी

प्रेमलता सामद की कहानी इस बात का उदाहरण है कि नियमित योगाभ्यास, संतुलित आहार और चिकित्सकीय परामर्श का पालन कर हाइपरथायरॉइडिज्म जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. उनकी यह यात्रा अब अन्य लोगों को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है.

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