NewsWave Desk: ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक हलचल के बीच भारत और अमेरिका सोमवार 20 अप्रैल से वॉशिंगटन में व्यापार वार्ता के नए दौर की शुरुआत करने जा रहे हैं. 20 से 22 अप्रैल तक चलने वाली तीन दिवसीय इस बातचीत का उद्देश्य प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देना है. भारतीय पक्ष की अगुवाई मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन कर रहे हैं और 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर 2025 के बाद पहली बार आमने-सामने की वार्ता में हिस्सा लेगा.
नई परिस्थितियों में बातचीत
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लगाए गए शुल्क को रद्द कर दिया. इस फैसले के बाद अमेरिकी शुल्क नीति में बड़ा बदलाव आया है. इसके स्थान पर अमेरिका ने 24 फरवरी से 23 जुलाई तक सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लागू कर दिया है.
शुल्क बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ा है. पहले जहां भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत तक आने की संभावना थी, वहीं अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. रूस से तेल खरीद पर प्रस्तावित 25 प्रतिशत जुर्माना भी अब लगभग समाप्त हो गया है, जिससे समीकरण नए सिरे से बन रहे हैं.
समझौते पर पुनर्विचार की गुंजाइश
चूंकि अभी तक इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, इसलिए भारत के पास इसे दोबारा परखने का अवसर है. अधिकारियों का मानना है कि नए वैश्विक शुल्क ढांचे में देश को किसी तरह का नुकसान न हो, इसके लिए सभी शर्तों की फिर से समीक्षा की जाएगी.
भारतीय निर्यातकों की चिंता
नई दिल्ली की प्राथमिकता अमेरिकी बाजार में अपनी लागत बढ़त को फिर से हासिल करना है. पहले कम शुल्क के चलते भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिली थी, लेकिन नए बदलावों के बाद यह लाभ प्रभावित हो सकता है.
रियायतों की समीक्षा संभव
फरवरी में हुए समझौते के तहत भारत ने अमेरिका को कई रियायतें दी थीं. इसमें औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क में कमी, कृषि उत्पादों जैसे मेवे, फल, सोयाबीन तेल और पेय पदार्थों पर शुल्क घटाना और गैर-शुल्क बाधाओं को हटाना शामिल था. अब इन सभी रियायतों पर फिर से विचार किया जा सकता है.
500 अरब डॉलर योजना पर नजर
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक के सामान खरीदने की योजना का संकेत दिया था. इसमें ऊर्जा, विमान, अर्धचालक से जुड़े कच्चे पदार्थ, कीमती धातुएं और कोकिंग कोयला शामिल हैं. मौजूदा वार्ता में इस योजना का भी पुनर्मूल्यांकन संभव है.
जांच बना तनाव का कारण
अमेरिका की ओर से धारा 301 के तहत चल रही जांचें भी इस वार्ता में बड़ा मुद्दा बन सकती हैं. इन जांचों में भारत सहित कई देशों की विनिर्माण क्षमता पर सवाल उठाए गए हैं. भारत ने इन जांचों का कड़ा विरोध किया है और इन्हें अनुचित बताते हुए वापस लेने की मांग की है.
नई शुरुआत की तरह बातचीत
शुल्क विवाद के चलते फरवरी में प्रस्तावित बैठक टाल दी गई थी. ऐसे में वॉशिंगटन में चल रही यह वार्ता एक तरह से नई शुरुआत मानी जा रही है, जो पूरी तरह बदले हुए वैश्विक व्यापार परिदृश्य में हो रही है.
चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
इस बीच चीन ने 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. भारत का अमेरिका को निर्यात हल्का बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंचा है, जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया है. वहीं व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है, जो पहले 40.89 अरब डॉलर था.
बदलते हालात में अहम फैसले की घड़ी
कुल मिलाकर, भारत और अमेरिका के बीच यह वार्ता सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक व्यापार संतुलन के बीच रणनीतिक दिशा तय करने का अहम मौका है. आने वाले दिनों में लिए गए फैसले दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं.
