Newswave Desk: भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों ने मंगलवार को इतिहास का एक नया पन्ना लिख दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए दोनों देशों के साझा भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की हुंकार भरी. पीएम मोदी इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं. अपने संबोधन में उन्होंने न सिर्फ एक्ट ईस्ट पॉलिसी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की सामूहिक ताकत को रेखांकित किया, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और इंडोनेशिया की जुगलबंदी को दुनिया की जरूरत बताया.
रामायण से लेकर लोकतंत्र तक
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता सिर्फ 75 साल पुराना नहीं है, बल्कि हजारों साल की साझा विरासत, रामायण के सांस्कृतिक धागों और समंदर की लहरों से जुड़ा है.एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों की तरक्की के लिए बेहद जरूरी है. भारत और इंडोनेशिया इस क्षेत्र में शांति के दो सबसे बड़े स्तंभ हैं.प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया को ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की एक मजबूत आवाज बताया और कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर काम करते हैं, तो पूरी दुनिया का संतुलन मजबूत होता है. बिना किसी का नाम लिए पीएम मोदी ने आतंकवाद और चरमपंथ को मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन बताया और दोनों देशों से इस खतरे के खिलाफ एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया.

जकार्ता में दिखा मोदी मैजिक
जैसे ही पीएम मोदी ने इंडोनेशियाई भाषा में वहां के सांसदों का अभिवादन किया, पूरी संसद तालियों की गड़गड़ाहत से गूंज उठी. उनके पूरे भाषण के दौरान कई बार इंडोनेशियाई सांसदों ने खड़े होकर उनका सम्मान किया. यह दृश्य भारत की बढ़ती वैश्विक साख और दोनों देशों के बीच के गहरे सम्मान को बयां करने के लिए काफी था.
इस दौरे के क्या है मायने
- रणनीतिक साझेदारी को नई उड़ान: इंडोनेशिया आसियान क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है. पीएम मोदी का यह दौरा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को एक नई ऊंचाई देने वाला है.
- चीन को सीधा संदेश: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे के बीच, भारत और इंडोनेशिया का यह साझा मंच दुनिया को यह संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और समुद्री स्वतंत्रता का सम्मान हर हाल में होना चाहिए.
- आर्थिक और रक्षा सहयोग: इस दौरे से दोनों देशों के बीच न सिर्फ व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी नए समझौतों का रास्ता साफ होगा.


