Jamtara: डिजिटल इंडिया और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जामताड़ा प्रखंड की गोपालपुर पंचायत अंतर्गत शतसाल नीचे टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद करीब 600 की आबादी वाले इस टोला में अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में उनका गांव विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कट गया है.
बरसात में बन जाती है दलदल
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में गांव की कच्ची सड़क दलदल और तालाब में तब्दील हो जाती है. इससे तीन से चार महीने तक गांव का संपर्क जिला मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से लगभग टूट जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में यहां की स्थिति नारकीय हो जाती है.

शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर
सड़क नहीं होने का सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है. कीचड़ और जलजमाव के कारण बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते. वहीं, किसी के बीमार पड़ने पर एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में मरीजों को खाट या चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं.
वादों से नाराज ग्रामीण
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उनके वादे हवा-हवाई साबित होते हैं. वर्षों से ग्रामीण अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई.
वोट बहिष्कार की चेतावनी
नेताओं और प्रशासन की उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है. ग्रामीणों ने एक स्वर में नारा दिया है कि सड़क नहीं तो वोट नहीं. उनका कहना है कि यदि आगामी पंचायत चुनाव से पहले सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो पूरा टोला मतदान का बहिष्कार करेगा.


