Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने रिम्स में मास्टर इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद पर रिषभ कुमार की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है. अदालत ने स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर की गई कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार और रिम्स से जवाब तलब किया है.
रिषभ कुमार के चयन पर उठा विवाद
दस्तावेज के अनुसार, रिषभ कुमार (रिम्स निदेशक के पुत्र) का चयन मास्टर इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद के लिए 30 अप्रैल 2026 को किया गया था. बताया गया कि 1 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य मंत्री सह रिम्स शासी परिषद अध्यक्ष के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा चयन को स्थगित रखने का आदेश जारी किया गया था. साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया की जांच के लिए प्रमंडलीय आयुक्त को जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी.

हाईकोर्ट में दाखिल की गई रिट याचिका
रिषभ कुमार ने इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की. याचिका में चयन से संबंधित स्थगन आदेश को निरस्त करने की मांग की गई. अदालत में यह भी कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पूरी की गई है और नियुक्ति संबंधी निर्णय लेने के लिए रिम्स शासी परिषद सक्षम प्राधिकरण है.
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योग्यता और अनुभव का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि रिषभ कुमार के पास हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विषय में डिप्लोमा और मास्टर डिग्री है तथा वे वर्तमान में इसी विषय में पीएचडी कर रहे हैं. दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया कि उन्होंने हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विषय पर लगभग 500 पृष्ठों की पुस्तक प्रकाशित की है और करीब 50 शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं.
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर दिया आदेश
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ऐसी नियुक्ति प्रक्रिया, जो निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हुई हो, उसे स्थगित करने की शक्ति नहीं रखते. अदालत ने स्वास्थ्य विभाग और रिम्स के आदेश पर रोक लगाते हुए रिषभ कुमार को मास्टर इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद पर योगदान करने की अनुमति देने का आदेश दिया.
रिम्स की अकादमिक प्रक्रिया का भी हुआ जिक्र
दस्तावेज में बताया गया कि रिम्स में संचालित मास्टर इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स को राज्य सरकार, रिम्स शासी परिषद और रांची विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है. यह भी कहा गया कि विभाग में ट्यूटर पद के सृजन और स्थानांतरण का निर्णय वर्ष 2024 में अकादमिक कमेटी द्वारा लिया गया था, जिसे बाद में शासी परिषद ने मंजूरी दी थी.
