Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में मेसर्स जील इंडिया केमिकल्स रांची के प्रोपराइटर अजय जालान की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है. बुधवार की सुनवाई के बाद सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अजय जालान ने विशेष पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) कोर्ट द्वारा उनकी डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज किए जाने और उनके खिलाफ आरोप गठित किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
मैकॉन के तत्कालीन सीनियर मैनेजर से जुड़ा है मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी. दोनों पक्षों के वकीलों की विस्तृत बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने की घोषणा की. यह पूरा कानूनी विवाद मैकॉन के तत्कालीन सीनियर मैनेजर से जुड़ा हुआ है. मैकॉन के मेटालर्जिकल विंग के सीनियर मैनेजर यूएन मंडल पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दो कंपनियों शिव मशीन टूल (चेन्नई) और जील इंडिया केमिकल (रांची)को अनुचित तरीके से वर्क ऑर्डर जारी किए थे.
रिश्वत के मामले में सीनियर मैनेजर पर दर्ज की गई थी प्राथमिकी
इस अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले को संज्ञान में लेते हुए पहले CBI ने 30 अक्टूबर 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी. सीबीआई की इसी प्राथमिकी को आधार बनाते हुए बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ईसीआईआर (ECIR) दर्ज किया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि एमईकॉन के उक्त सीनियर मैनेजर ने दोनों कंपनियों को कार्यदेश दिलाने के एवज में करीब 1.65 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत ली थी.
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