Ranchi: झारखंड उच्च न्यायालय ने जाली दस्तावेजों के आधार पर 35,875 रुपए का आयकर रिफंड दावा करने के मामले में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के एक कर्मचारी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली और अपीलीय अदालतों के फैसलों में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस कारण नहीं है. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता शशि भूषण प्रसाद भुइयां की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया और अदालत ने उन्हें दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने और अपनी बची हुई सजा काटने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने भुइयां की जमानत भी रद्द कर दी.
विभाग को दौरान मालूम हुआ दस्तावेज फर्जी थे
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि फैसले से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने जाली दस्तावेजों के आधार पर 35,875 रुपए के रिफंड का दावा किया था जिसके लिए उनकी ओर से कोई वैध स्पष्टीकरण या कारण नहीं दिया गया. ईसीएल कर्मचारी शशि भूषण प्रसाद भुइयां ने आकलन वर्ष 2003-04 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किया था. इसमें उन्होंने एक होम लोन पर टैक्स कटौती का हवाला देते हुए 35,875 रुपए के रिफंड का दावा किया लेकिन जांच के दौरान आयकर विभाग को पता चला कि रिटर्न के साथ जमा किया गया फॉर्म 16 और अन्य दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी थे. बैंक ऑफ इंडिया ने भी पुष्टि की कि भुइयां के नाम पर ऐसा कोई होम लोन खाता कभी अस्तित्व में ही नहीं था.
आयकर अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज
इसके बाद आरोपी के खिलाफ आयकर अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई गई थी. बचाव में शशि भूषण भुइयां ने तर्क दिया कि वह ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं और उन्होंने अपने कार्यालय के एक क्लर्क से आईटीआर दाखिल करने को कहा था. उनका दावा था कि क्लर्क ने उनकी जानकारी के बिना यह रिटर्न भरा और उन्होंने खुद कभी रिफंड की मांग नहीं की. हालांकि आयकर विभाग ने इस दलील का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अनपढ़ होना जाली दस्तावेजों के सहारे झूठा रिफंड का दावा करने का बहाना नहीं हो सकता.
