झारखंड हाईकोर्ट फैसला: तालाब की जमीन पर बना मकान होगा ध्वस्त

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ जिले में तालाब की जमीन पर बने मकान को ध्वस्त किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका को...

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ जिले में तालाब की जमीन पर बने मकान को ध्वस्त किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने पाकुड़ के बैंक कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि पूर्व में दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करना न्यायिक मर्यादा के खिलाफ होगा.

याचिकाकर्ता का तर्क था कि जिस जमीन पर मकान बना है वह उसकी निजी जमीन है

याचिकाकर्ता धर्मेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर पाकुड़ जिला प्रशासन की ओर से जारी ध्वस्तीकरण नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का तर्क था कि जिस जमीन पर मकान बना है वह उसकी निजी रैयती संपत्ति है जहां उसने स्वयं तालाब बनवाया था और बाद में उसे पाटकर मकान का निर्माण कराया. दूसरी ओर प्रशासन वर्ष 2015 के एक अदालती आदेश का पालन करते हुए इस अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई कर रहा था.

कोर्ट ने क्या कहा 

कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2015 के आदेश में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि जमीन को दुबारा तालाब के रूप में बहाल किया जाए और संताल परगना टेनेंसी (SPT) एक्ट की धारा 35 के बिना इसका कोई अन्य उपयोग न हो. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही याचिकाकर्ता 2015 के मामले में पक्षकार नहीं था फिर भी एक एकल पीठ दूसरी एकल पीठ के अंतिम आदेश को निष्प्रभावी नहीं कर सकती. अगर याचिकाकर्ता को शिकायत है तो वह अदालत की अनुमति लेकर इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर सकता है. सुनवाई के दौरान जब वकील ने बताया कि प्रशासन आज ही मकान गिराने वाला है तो हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए तुरंत आदेश की प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

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