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झारखंड : नदियों को प्रदूषित करने वाले उद्योगों की अब खैर नहीं, वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम और विजन कैमरा से होगी निगरानी

Ranchi : झारखंड की जीवनरेखा कही जाने वाली नदियां स्वर्ण रेखा, दामोदर, गंगा, हरमू और कोयल औद्योगिक कचरे और सीवेज से प्रदूषित...

वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम

Ranchi : झारखंड की जीवनरेखा कही जाने वाली नदियां स्वर्ण रेखा, दामोदर, गंगा, हरमू और कोयल औद्योगिक कचरे और सीवेज से प्रदूषित हो गई हैं. इसको देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त फैसला लिया है. अब झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रियल-टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत नदियों की कड़ी निगरानी करेगा.

टाइटेनियम सेंसर सिस्टम अनिवार्य

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टाइटेनियम-आधारित सेंसर सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है. टाइटेनियम की अभेद्य मजबूती और जंग-रोधी क्षमता का अर्थ है कि अब सेंसर को खराब होने का बहाना नहीं मिलेगा. ये सेंसर नदियों के सबसे संवेदनशील हिस्सों में तैनात होंगे. जो हर पल पानी की गुणवत्ता की रिर्पोट कंट्रोल रूम को भेजेगा.

हर स्टेशन पर होगी डे नाइट विजन की तैनाती

हर स्टेशन पर ‘डे-नाइट विजन’ कैमरों की तैनाती की जाएगी. कोई भी औद्योगिक इकाई या निकाय अगर चुपके से प्रदूषित पानी नदी में छोड़ने की कोशिश करेगा, तो उसकी लाइव फुटेज सीधे बोर्ड के अधिकारियों की स्क्रीन पर होगी. डेटा में 15 मिनट की भी देरी हुई, तो उसे सेवा में भारी चूक माना जाएगा. सभी वीडियो रिकॉर्डिंग डीवीआर-एनवीआर के जरिए एक महीने के लिए बैकअप के रूप में रखी जाएगी. जिसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कभी भी रिट्रीव (प्राप्त) कर सकेगा.

जवाबदेही भी तय होगी

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह प्रोजेक्ट पांच साल के सख्त सेवा अनुबंध पर आधारित है. अगर सिस्टम में कोई खराबी आती है, तो उसे तत्काल ठीक करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी. ‘सेल्फ-डायग्नोस्टिक’ फीचर्स के कारण सेंसर की चोरी या छेड़छाड़ अब नामुमकिन है. बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मॉनिटरिंग सिस्टम झारखंड की जल-संपदा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी बड़े उद्योग या संस्थान को नहीं बख्शेगा.

कैसे होगी नदियों की निगरानी, क्या है पूरा प्लान

• इस सिस्टम के जरिए अब किसी भी औद्योगिक इकाई या शहरी निकाय का छिपाना संभव नहीं होगा. हर घंटे का सटीक डेटा यह बताएगा कि नदी किस बिंदु पर और कितनी जहरीली हो रही है. जिससे सीधा दोष तय होगा.
• प्रदूषण की रिपोर्ट के लिए किसी कागजी जांच का इंतजार नहीं होगा. सिस्टम सीधे सीपीसीबी और जेएसपीसीबी के सर्वर को डेटा भेजेगा. यह ‘ऑनलाइन ट्रांसपेरेंसी’ उन लोगों के लिए सबसे बड़ा डर है जो अब तक भ्रष्टाचार की आड़ में नदियां गंदी कर रहे थे.
• यदि पानी का मापदंड तय सीमा से थोड़ा भी ऊपर जाता है, तो सिस्टम खुद ही अलार्म बजा देगा और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल अलर्ट भेजेगा. यह तकनीकी अलर्ट अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आधार बनेगा.
• यह सिस्टम 24×7 काम करेगा और इसका पूरा डेटाबेस कम से कम एक साल तक के लिए सुरक्षित रखा जाएगा. जिसे कभी भी रिट्रीव किया जा सकेगा. यह डेटा भविष्य में प्रदूषकों को अदालत में कटघरे में खड़ा करने के लिए सबसे पुख्ता सबूत होगा.
• हर एक घंटे में कैमरा न केवल पानी के स्क्रीन वैल्यू की फोटो लेगा, बल्कि सेंसर के आसपास के इलाके की भी फुटेज भेजेगा.

 

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