झारखंड में तैयार हो रहा देश का पहला हाई-टेक रेस्क्यू प्लान, जंगल में बनेगा हाथियों का अपना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रेस्क्यू के लिए आठ टन का मॉनस्ट ट्रक भी

Ranchi: वन विभाग ने हाथी मानव द्वंद को रोकने और हाथियों की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन गजराज’ का पूरा खाका तैयार कर...

जंगल में बनेगा हाथियों का अपना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रेस्क्यू के लिए आठ टन का मॉनस्ट ट्रक भी

Ranchi: वन विभाग ने हाथी मानव द्वंद को रोकने और हाथियों की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन गजराज’ का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है.अब हाथियों के इलाज और रेस्क्यू के लिए एक-दो नहीं, बल्कि दो मोर्चों पर काम कर रहा है. एक तरफ जहां एलीफेंट ट्रांजिट एंड ट्रीटमेंट सेंटर (हाथी संक्रमण एवं उपचार केंद्र) का निर्माण किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जंगलों में तुरंत दौड़ने के लिए सुपर-एडवांस और हाई-टेक मॉन्स्टर रेस्क्यू ट्रकों का बेड़ा तैयार हो रहा है.

जंगल में बनेगा हाथियों का अपना ‘सुपर स्पेशलिटी अस्पताल

हाथियों के संरक्षण के लिए बोकारो वन प्रभाग एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर काम कर रहा है. इसका मकसद एक ऐसा माहौल तैयार करना है जहाँ घायल या भटक चुके हाथियों का प्राकृतिक माहौल में ही इलाज किया जा सके. इस ड्रीम प्रोजेक्ट में हाथियों के रहने, उनके घूमने और त्वरित इलाज के लिए हर आधुनिक सुविधा होगी. हाथियों को सुरक्षित रखने और प्राकृतिक माहौल देने के लिए 1 क्राल और 2 विशाल एनक्लोजर बनाए जाएंगे. हाथियों की देखभाल करने वाले महावतों के रहने के लिए कैंप और पशु डॉक्टरों के लिए चौबीसों घंटे चालू रहने वाली मेडिकल यूनिट होगी.

सॉफ्ट रिलीज की सुविधा

उपचार के बाद हाथी को बिना किसी तनाव के वापस जंगल में छोड़ने (सॉफ्ट रिलीज) के विशेष डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं.एनक्लोजर के अंदर ही तालाब, नदियां, घास के मैदान और घने पेड़-पौधे लगाए जाएंगे ताकि हाथी खुद को पिंजरे में नहीं बल्कि अपने प्राकृतिक घर में महसूस करे.: पूरे इलाके पर नजर रखने के लिए सर्विलांस कैमरे और इमरजेंसी अलार्म सिस्टम लगाए जाएंगे ताकि हाथियों और कर्मचारियों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

8-टन की ताकत वाला ‘मॉन्स्टर ट्रक

अब तक हाथियों के रेस्क्यू में सबसे बड़ी बाधा बनती थी सही गाड़ियों का न होना. पुरानी और साधारण गाड़ियों में विशालकाय हाथियों को लादना किसी खतरे से खाली नहीं होता था. लेकिन अब मैदान में अशोक लेलैंड बॉस 1920 मॉडल पर बनने वाला एलीफेंट रेस्क्यू एंड ट्रांसलोकेशन ट्रक को उतारा जाएगा.इसमें 6 से 8 टन तक का भार उठाने वाला पूरी तरह से हाइड्रोलिक रैंप लगा होगा, जिससे भारी-भरकम हाथी को आसानी से गाड़ी पर चढ़ाया जा सके. सफर के दौरान झटके लगने से हाथी घायल न हो, इसके लिए गाड़ी के चारों तरफ हवा से फूलने वाले विशेष ‘एयर कुशन’ लगे होंगे.ट्रक में ही टच-लेस डिजिटल थर्मोमीटर और सीसीटीवी कैमरे होंगे. अगर सफर में हाथी का तापमान बढ़ता है या वो घबराता है, तो क्रू केबिन से ही वाटर मिस्टिंग शॉवर चलाकर उसका गुस्सा ठंडा किया जाएगा. ट्रक के फर्श पर हरा कोयर टर्फ मैट बिछा होगा और पेड़ की डालियों के लिए विशेष जगह होगी ताकि हाथी को पैनिक अटैक न आए. इसमें 2200 लीटर का वाटर टैंक और पावरफुल इंजन भी होगा.

जंगलों में पहुंचेगी ‘सुपरसोनिक’ मोबाइल वैट एम्बुलेंस

हाथियों के साथ-साथ अन्य छोटे-बड़े जंगली जानवरों के त्वरित इलाज के लिए महिंद्रा बोलेरो 2.0 मैक्स पिकअप को एक आधुनिक ‘एनिमल वेटरनरी वैन’ में बदला जा रहा है. यह एम्बुलेंस दुर्गम से दुर्गम रास्तों पर भी मिनटों में पहुंचेगी: इसमें सर्जिकल लाइट, डॉक्टरों के बैठने की व्यवस्था और दवाइयों के लिए रेफ्रिजरेटर की व्यवस्था होगी.बेहोश किए गए जानवरों को सुरक्षित उठाने के लिए फोल्डेबल और मैनुअल स्ट्रेचर मौजूद रहेंगे. रेस्क्यू के वक्त भीड़ को हटाने के लिए इसमें शक्तिशाली हूटर्स और लाउडस्पीकर लगाए गए हैं.

कोताही बर्दाश्त नहीं, लगेगा भारी जुर्माना.

वन विभाग ने इस पूरे प्रोजेक्ट को समयबद्ध सीमा में पूरा करने का सख्त आदेश दिया है. एलीफेंट रेस्क्यू ट्रक को ऑर्डर और चेसिस मिलने के 90 कार्य दिवसों के भीतर बनाकर देना होगा.वेटरनरी वैन को मात्र 60 कार्य दिवसों के भीतर डिलीवर करना होगा.: अगर काम में बिना किसी जायज वजह के देरी होती है, तो ठेकेदार पर 1% प्रति सप्ताह के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा, जो कुल कांट्रैक्ट का अधिकतम 10% तक हो सकता है. गंभीर लापरवाही पर ज़मानत राशि भी जब्त कर ली जाएगी.

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