Ranchi: झारखंड में अलनीनो और कम बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने की तैयारी तेज कर दी है. इसी कड़ी में राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्र सरकार से अलनीनो से प्रभावित जिलों के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में शिल्पी नेहा तिर्की ने झारखंड सरकार की तैयारियों और कंटीजेंसी प्लान का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संभावित सूखे जैसे हालात को देखते हुए मई महीने में ही तैयारी शुरू कर दी थी और जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक किसानों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है.
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देशभर में 40% बारिश की कमी, 248 जिलों में हालात चिंताजनक
बैठक में भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 1 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 74 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 37 मिमी बारिश दर्ज हुई है. यानी देशभर में करीब 40 फीसदी वर्षा की कमी बनी हुई है. इसके साथ ही 248 जिलों में सामान्य बारिश नहीं हुई है और अगले दो हफ्तों में भी हालात सामान्य होने की उम्मीद कम है.
मड़ुवा, मक्का और दलहन पर फोकस
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड सरकार ने मौसम की मार से निपटने के लिए जलवायु-अनुकूल खेती पर जोर दिया है. इसके तहत मड़ुवा, मक्का और दलहनी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि कम बारिश की स्थिति में भी किसान खेती जारी रख सकें. इसके अलावा किसानों की आय को सुरक्षित रखने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, लाह उत्पादन, मत्स्य पालन और वनोपज आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि फसल प्रभावित होने की स्थिति में किसानों के सामने आय का दूसरा विकल्प मौजूद रहे.
किसानों को राहत देने के लिए केंद्र से मदद की मांग
बैठक में शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि जिन जिलों में औसत से कम बारिश हुई है और जहां अलनीनो का असर पड़ने की आशंका है, वहां के किसानों के लिए स्पेशल रिलीफ पैकेज दिया जाए. उन्होंने कहा कि समय रहते आर्थिक सहायता मिलने से किसानों को बड़े संकट से बचाया जा सकेगा.
उर्वरक की कमी पर भी जताई चिंता
मंत्री ने उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी मजबूती से उठाया. उन्होंने बताया कि झारखंड ने केंद्र सरकार से 3 लाख 90 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, लेकिन अब तक केवल 3 लाख 20 हजार मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने पर सहमति मिली है. उन्होंने राज्य की जरूरत के मुताबिक शेष उर्वरकों की जल्द आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि खरीफ सीजन में किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो.
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राज्य सरकार का दावा- तैयारी पहले से पूरी
मंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार ने सिर्फ फसल बचाने की रणनीति ही नहीं बनाई है, बल्कि किसानों को बदलते मौसम के अनुरूप खेती के लिए प्रशिक्षित भी किया जा रहा है. सरकार का फोकस इस बात पर है कि कम बारिश या सूखे जैसी स्थिति में भी किसानों की खेती और आय दोनों प्रभावित न हों.


