
Ranchi: झारखंड पुलिस विभाग में प्रमोशन को लेकर कई त्रुटियां हैं. जिसका खामियाजा झारखंड पुलिस के कर्मी भुगतते हैं. झारखंड पुलिस विभाग में प्रमोशन को लेकर एक अजीब मामला सामने आया है. राज्य में साल 1990 में बहाल हुए सैकड़ों पुलिसकर्मी आज भी एएसआई के पद पर ही कार्य कर रहे हैं. दूसरी ओर, उनसे ठीक छह साल बाद यानी 1996 में बहाल हुए पुलिसकर्मियों को एसआई में प्रमोशन मिल गया है. इस प्रकार की प्रमोशन होने से झारखंड पुलिस कर्मी के कई लोग नाराज हैं. 1990 बैच के वरीय सिपाही खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
कार्यशैली पर पड़ता है असर
झारखंड पुलिस मुख्यालय के इस प्रकार की रवैया से कार्य शैली पर प्रभाव पड़ता है. जो सिपाही जूनियर हैं उन्हें बड़े-बड़े केस को अनुसंधान करने की जिम्मेदारी मिलती है. लेकिन जो वरीय सिपाही होते हैं, उन्हें बड़े-बड़े केसों में अनुसंधान करने की जिम्मेदारी नहीं मिलती है. जिसका सीधा असर झारखंड पुलिस के कार्य शैली पर पड़ता है. इस विसंगति का सबसे गंभीर असर मौजूदा स्थिति में 1996 बैच के जो पुलिसकर्मी प्रमोट होकर अधिकारी बन चुके हैं, वे अब 1990 बैच के अपने सीनियरों के बॉस हैं. जमीनी स्तर पर काम के दौरान इस वजह से भारी तालमेल की कमी देखी जाती है. प्रोन्नत होकर आए अधिकारी अब अपने से छह साल सीनियर पुलिसकर्मियों को निर्देश देते हैं, जिससे कार्यस्थल पर असहज स्थिति पैदा हो रही है. कई मौकों पर यह देखा गया है कि प्रमोट होकर आए नए अधिकारी अपने पुराने अनुभवी सहकर्मियों को वह तवज्जो और सम्मान नहीं देते, जिसके वे हकदार हैं. अनुभव में काफी सीनियर होने के बावजूद 1990 बैच के पुलिसकर्मियों को कम आंका जाता है. उनकी सलाह और कार्यक्षमता की उपेक्षा की जाती है. यह स्थिति पुलिस बल के मनोबल को बुरी तरह तोड़ रही है.
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पुलिस एसोसिएशन ने उठाई आवाज
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने इस मुद्दे को कई बार उठाया है और पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर अवगत कराया है कई सालों बीत जाने के बावजूद इस पर कोई नहीं पहल नहीं हुई है जिसके कारण 1990 बैच में बहाल पुलिसकर्मी काफी नाराज हैं. एसोसिएशन का कहना है कि जो सिपाही 35 से अधिक वर्षों से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वे बिना प्रमोशन पाए रिटायर होने की कगार पर हैं. यह उनके मानवाधिकारों और सेवा शर्तों का सीधा उल्लंघन है. एसोसिएशन ने मांग की है कि 1990 बैच के सभी पात्र सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से वन-टाइम रिलैक्सेशन देकर मानद प्रमोशन दिया जाए. पुलिस एसोसिएशन का कहना है कि यदि जल्द ही इस विसंगति को सुधारा नहीं गया, तो कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले इस बल के भीतर आंतरिक अनुशासन का संकट और गहरा सकता है.
