रांची: झारखंड में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए शासन और विकास की नई व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम शुरू हो गया है. राज्य का सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग एआई आधारित इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है. विभाग की योजना के अनुसार एआई तकनीक का उपयोग शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और डेटा-आधारित बनाने में किया जाएगा. इसके तहत नए आइडिया और तकनीकी समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और संस्थानों को भी प्रोत्साहित किया जाएग. सोमवार को अल्पसूचित प्रश्न के तहत सरयू राय ने सवाल पूछा कि क्या एआई को लेकर झारखंड में कोई नीति और कार्यक्रम नहीं है.जिसके जवाब में यह जानकारी सरकारी की ओर से दी गई कि सेंटर अॉफ एक्सीलेंस स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिलेगा तकनीकी प्लेटफॉर्म:
इस केंद्र के माध्यम से एआई आधारित शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा.यहां स्टार्टअप, शोध संस्थान और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर ऐसे एआई मॉडल विकसित करेंगे, जिनसे सरकारी विभागों की विभिन्न समस्याओं का समाधान निकाला जा सके.इसके साथ ही उद्योग, अकादमिक संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा, ताकि तकनीक का उपयोग व्यावहारिक और प्रभावी तरीके से हो सके.
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शासन में ऐसे होगा एआई का उपयोग:
सरकार की योजना है कि एआई तकनीक का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाए. इसके माध्यम से सरकारी सेवाओं के निपटारे को अधिक तेज और डिजिटल बनाया जाएगा. डेटा विश्लेषण के जरिए नीति निर्माण को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में भी काम होगा. इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित स्मार्ट समाधान विकसित किए जाएंगे. प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने में भी एआई तकनीक अहम भूमिका निभाएगी.
जाने क्या होगा फायदा:
– सरकारी सेवाएं तेज और पारदर्शी होंगी
– युवाओं के लिए नई तकनीकी नौकरियां पैदा होंगी.
– डेटा आधारित निर्णय से योजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी
