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झारखंड के सरकारी खजाने पर डिजिटल डाका: कहीं वेतन घोटाला तो कहीं 10 हजार करोड़ की फाइलें गायब, कोषागार की सुरक्षा में सेंध

Ranchi: झारखंड में कोषागार फ्रॉड अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल रूप ले चुका है. राज्य के कोषागारों से...

Ranchi: झारखंड में कोषागार फ्रॉड अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल रूप ले चुका है. राज्य के कोषागारों से फर्जी बिलों और डिजिटल हेराफेरी के जरिए करोड़ों रुपये की चपत लगाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ताज़ा मामला बोकारो का है, जहां एक मामूली दारोगा के वेतन के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है. वहीं, राज्य के पर्यटन और ऊर्जा निगमों के खातों से 100 करोड़ से अधिक की हेराफेरी पर अब सीबीआई की तलवार लटक रही है.

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कहां-कहां हुआ है फ्रॉड

बोकारो कोषागार (अप्रैल 2026): वेतन के नाम पर 3.15 करोड़ की चपत

हालिया सबसे चौंकाने वाला मामला बोकारो से आया है. यहां पुलिस एसपी कार्यालय के एक अकाउंटेंट ने पुलिस उपनिरीक्षक के वेतन मद में 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी कर ली. मई 2024 से मार्च 2026 के बीच, एक दारोगा जिसका वेतन लगभग 1 लाख रुपये होना चाहिए, उसके नाम पर फर्जी डेटा पंच कर करोड़ों रुपये निकाले गए और ये पैसे आरोपी ने अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए.

पर्यटन एवं ऊर्जा निगम (मार्च 2026): 109 करोड़ की फर्जी निकासी

झारखंड पर्यटन विकास निगम और ऊर्जा निगम के खातों से 109 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का मामला हाईकोर्ट में है. इस मामले में एसआईटी ने अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये फ्रीज कराए हैं. लेकिन शेष राशि का सुराग नहीं मिल पाया है. अदालत ने इस मामले में सीबीआई जांच के संकेत दिए हैं.

चतरा (हंटरगंज): 15वीं वित्त योजना में 9 लाख का गबन

चतरा जिले के तिलहेत पंचायत में जल मीनार की मरम्मत और कार्यालय सौंदर्यीकरण के नाम पर 9 लाख रुपये की अवैध निकासी कागजों पर ही कर ली गई. धरातल पर कोई काम नहीं हुआ, जिसके बाद चार पंचायत सचिवों पर शिकंजा कसा गया है.

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10,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का दावा

फरवरी 2026 में विपक्ष के नेताओं और अन्य जनप्रतिनिधियों ने ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य कोषागार से 10,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध मिलान का मुद्दा उठाया. दावा किया गया है कि विभिन्न विभागों के खर्च और कोषागार के आंकड़ों में भारी अंतर है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है.

कोषागार फ्रॉड की क्या है वजह?

• डिजिटल पंचिंग में खामियां: सरकारी कर्मचारी सिस्टम के पासवर्ड और डेटा एंट्री में हेरफेर कर फर्जी बेनेफिशियरी बना देते हैं.
• ऑडिट में देरी: विभागों और कोषागार के बीच नियमित मिलान की कमी का फायदा घोटालेबाज उठाते हैं.
• मिलीभगत: अक्सर विभाग के अकाउंटेंट और बैंक कर्मियों की साठगांठ से बड़ी राशि निजी खातों में ट्रांसफर की जाती है.

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