Koderma: आज सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार की अध्यक्षता तथा जिला भी.बी.डी पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार की उपस्थिति में जापानी इंसेफ्लाइटिस और डेंगू, चिकनगुनिया एवं अन्य वैक्टर जनित रोगों के प्रति एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों को वैक्टर जनित रोगों, विशेष रूप से जापानी इंसेफ्लाइटिस (जे0ई0), डेंगू/चिकनगुनिया के खतरों और उनके रोकथाम के उपाय के प्रति जागरूक करना था. कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि जापानी इंसेफ्लाइटिस एक विषाणुजनित रोग है जो मुख्य रूप से क्युलेक्स प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है. यह संक्रमण चक्र मुख्य रूप से सुअर और जल पक्षी (जैसे बगुला) से मच्छरों के माध्यम से मनुष्यों तक पहुंचता है. जब मच्छर संक्रमित जानवर को काटते हैं और फिर स्वस्थ मनुष्य को काटते हैं तो यह वायरस मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है.

टीकाकरण और सतर्कता से इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है
यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती है. जे0ई0 के प्रकोप को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय महत्वपूर्ण है. जे0ई0 के प्रति सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है. बच्चो को जे0ई0 का टिका अवश्य लगवाए. पर्यावरण प्रबंधन के अन्तर्गत सुअर बाड़ों को रिहायशी इलाकों से दूर रखना आवश्यक है. जल जमाव को रोकें, क्योकि रुके हुए पानी में ये मच्छर पनपते हैं. यह धान के खेतों में जमें पानी में भी प्रजनन कर सकते हैं. घरों के अन्दर किटनाशक का छिड़काव एवं खुले क्षेत्रों में फॉगिंग एवं मच्छरदानी का प्रयोग, पूरे बाजू के कपड़े पहनने और मच्छर विकर्षक क्रीम का प्रयोग इससे बचाव के कारगर तरीके हैं. प्रशिक्षण के दौरान डेंगू और चिकनगुनिया की निगरानी को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा हुई. इन बीमारियों के लक्षणों में अचानक तेज बुखार, जोड़ों में तेज दर्द, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द और शरीर पर चकत्ते शामिल है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जांच कराने की सलाह दी गई. सिविल सर्जन, डा0 अनिल कुमार ने कहा जापानी इंसेफ्लाइटिस एक गंभीर रोग है लेकिन सही समय पर टीकाकरण और सतर्कता से इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है.
ये शामिल रहें
जिला भी0बी0डी0 पदाधिकारी, डा0 मनोज कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मच्छरों के प्रजनन को रोकने और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगे. इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मरकच्चो डा0 मोनिका मिश्रा, प्रशिक्षक के रूप में डा0 प्रमोद कुमार राज एवं जिला भी0बी0डी0 सलाहकार, कृष्ण कान्त मणि, डी0पी0एम0, महेश कुमार, आर0बी0एस0के0 से डा0 सुरेश कुमार राणा, डा0 विश्वकर्मा गोस्वामी, डा0 प्रहलाद कुमार, डा0 मनोज कुमार तथा एफएलए शंभु कुमार, ललन कुमार राणा, शंकर कुमार, सुनिल कुमार पंडित, दीनदयाल, आदि मौजूद थे.

