नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के आगाज में बोले CM हेमंत सोरेन – झारखंड की पहचान अब सिर्फ माइंस से नहीं, माइंड से भी होनी चाहिए

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ‘स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन’ कार्यक्रम के उद्घाटन...

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Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ‘स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन’ कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर राज्य के भविष्य की एक बेहद सकारात्मक, दूरदर्शी और गौरवशाली रूपरेखा पेश की. अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड अब केवल एक खनन राज्य की पुरानी छवि से बाहर निकलकर बौद्धिक क्षमता, आधुनिक तकनीक और समावेशी विकास (इनक्लूसिव ग्रोथ) के एक नए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने के लिए पूरी तरह तैयार है.सीएम ने देश-दुनिया के निवेशकों और दिग्गजों को एक नया दृष्टिकोण देते हुए कहा कि आज के आधुनिक दौर में सिर्फ ‘रिसोर्स’ (संसाधन) पर निर्भर रहने के बजाय ‘रिसर्च’ (अनुसंधान) पर ध्यान केंद्रित करना होगा. उन्होंने एक बेहद प्रभावशाली नारा देते हुए कहा कि झारखंड की पहचान सिर्फ माइंस (खदानों) से नहीं, बल्कि माइंड (बौद्धिक क्षमता) से होनी चाहिए.

समावेशी विकास और इनोवेशन पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में विकास की एक नई परिभाषा सामने रखी.उन्होंने कहा कि झारखंड केवल आर्थिक आंकड़ों की वृद्धि (ग्रोथ) तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि राज्य का लक्ष्य ‘इनक्लूसिव ग्रोथ’ (समावेशी विकास) हासिल करना है, जहां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे. इसके साथ ही उन्होंने ‘इनोवेशन’ (नवाचार) को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब देश के कई अन्य राज्य विभिन्न क्षेत्रों में बहुत आगे निकल चुके थे, तब झारखंड राज्य का जन्म हुआ था. एक युवा राज्य होने के बावजूद, जैसे-जैसे समय बीतता गया, झारखंड ने अपनी मेहनत और नीतियों के बल पर वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है.

वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम में झारखंड की ऐतिहासिक दस्तक

मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ इस बात का उल्लेख किया कि वर्तमान सरकार के प्रयासों के चलते पहली बार झारखंड को ‘वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम’ के वैश्विक मंच तक पहुंचाने का ऐतिहासिक काम किया गया है.इसके माध्यम से झारखंड की क्षमताओं, प्राथमिकताओं और यहां की बातों को देश तथा दुनिया के सामने बेहद प्रभावी ढंग से रखा गया. मुख्यमंत्री ने पूरे आत्मविश्वास के साथ घोषणा की कि झारखंड न केवल इस बार, बल्कि अगली बार भी वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगा और दुनिया को अपनी प्रगति से रूबरू कराएगा.

देश-दुनिया को दी बौद्धिक ताकत और ब्यूरोक्रेट्स की सौगात

अपने संबोधन में सीएम हेमंत सोरेन ने झारखंड के जनमानस की बौद्धिक क्षमता की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि झारखंड ने पूरे देश को न केवल प्रचुर खनिज संपदा दी है, बल्कि हमेशा से ज्ञान और बौद्धिक ताकत भी प्रदान की है.तकनीक के क्षेत्र में और देश-दुनिया के प्रशासनिक ढांचे में झारखंड के ब्यूरोक्रेट्स (प्रशासनिक अधिकारियों) ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है.आज भी अलग-अलग समय पर, अलग-अलग वैश्विक मंचों पर झारखंड के संदर्भ में सकारात्मक बातें होती हैं. झारखंड के मूल निवासी आज पूरी दुनिया और देश के कोने-कोने में बड़े-बड़े पदों पर जुड़े हुए हैं और अपनी मेधा का लोहा मनवा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब हमें इस विशाल बौद्धिक ताकत का उपयोग खुद अपने राज्य झारखंड के चहुंमुखी विकास और उत्थान के लिए करना चाहिए.

संवेदनशील खनिजों का तकनीकी संरक्षण: यूरेनियम और माइका पर विज़न

झारखंड की अद्वितीय खनिज संपदा की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कई ऐसे खनिज मौजूद हैं जो बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर इनके बेहतर और सुरक्षित उपयोग का प्रयास किया जाना चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड के पास यूरेनियम का ऐसा विशाल भंडार है कि आने वाले 100 साल तक देश को इसे किसी दूसरी जगह खोजने की आवश्यकता ही नहीं है.इसी तरह, राज्य में माइका (अभ्रक) जैसी बहुमूल्य खनिज संपदा भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. हालांकि, उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ यह भी स्वीकार किया कि अब तक इन क्षेत्रों में वैसी उन्नत तकनीक नहीं पहुंच पाई है जैसी होनी चाहिए थी. इसलिए अब सरकार का पूरा ध्यान इन संसाधनों को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने पर है.

जमीन के ऊपर और नीचे असीम संभावनाएं, टूरिज्म में लंबी छलांग की तैयारी

मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आकर्षित करते हुए कहा कि झारखंड एक ऐसा अनूठा राज्य है जहां जमीन के नीचे (खनिज संपदा) और जमीन के ऊपर (प्रकृति, संस्कृति और मानव संसाधन) दोनों ही स्तरों पर असीम संभावनाएं मौजूद हैं. राज्य सरकार अब सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘टूरिज्म’ (पर्यटन) के क्षेत्र में भी बहुत तेजी से आगे बढ़ने की पूरी तैयारी कर चुकी है. झारखंड की हरी-भरी वादियों, जलप्रपातों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा रहा है.

निवेश नहीं, दीर्घकालिक साझेदारी है सोच

निवेशकों से एक भावुक और व्यावहारिक अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार सिर्फ तात्कालिक निवेश लाने या एमओयू साइन करने में विश्वास नहीं रखती. उन्होंने आग्रह किया कि हमें सिर्फ निवेश को लेकर नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ लंबे समय तक कैसे चलें, इस पर काम करने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सोच बिल्कुल स्पष्ट है. हम ऐसी रूप-रेखा तैयार करना चाहते हैं जो लंबी अवधि के लिए हो, जिससे राज्य और उद्योग दोनों का सतत विकास हो सके.” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार रास्ते में आने वाली तमाम चुनौतियों का समाधान करते हुए पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगी.

हर नागरिक तक पहुंच और वैश्विक औद्योगिक क्रांति के लिए तैयारी

सीएम सोरेन ने कहा कि आज दुनिया एक बहुत बड़े तकनीकी और औद्योगिक रिवॉल्यूशन (क्रांति) के दौर से गुजर रही है. इतिहास गवाह है कि समय के साथ बहुत सारी चीजें आईं और चली गईं, लेकिन जो समय के साथ खुद को तैयार रखता है, वही टिका रहता है. आज झारखंड के लिए यह बेहद आवश्यक है कि विकास की पहुंच राज्य के हर एक नागरिक तक सुनिश्चित हो.आने वाले समय की चुनौतियों और अवसरों के लिए झारखंड को अभी से तैयार होना होगा. वर्तमान में आईटी सेक्टर ने बहुत तेजी से रफ्तार पकड़ी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भी अपने कदम रख दिए हैं. झारखंड इन सभी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.

‘कॉपी-पेस्ट’ संस्कृति को ना, स्थानीय इको-सिस्टम पर टिकी नीति

उद्योगों की स्थापना को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बेहद व्यावहारिक और नीतिगत बात कही. उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग के लिए केवल जमीन देख लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसके पूरे ‘इको-सिस्टम’ को समझने और मजबूत करने की जरूरत होती है.एक सफल उद्योग के लिए रिलायबल पावर (भरोसेमंद बिजली), मजबूत आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर), सुगम आवागमन की व्यवस्था, टैलेंटेड स्किल (कुशल मानव श्रम) और एक फ्रेंडली पॉलिसी एनवायरमेंट (नीतिगत माहौल) का होना बेहद जरूरी है, और झारखंड सरकार इन सभी पैमानों पर तेजी से काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा कि राज्य, देश और विदेश सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं और भौगोलिक परिस्थितियां होती हैं, इसलिए विकास के मामले में ‘कॉपी पेस्ट’ की संस्कृति नहीं होनी चाहिए. हमें किसी दूसरे राज्य की नकल करने के बजाय अपने स्वयं के संसाधनों को ध्यान में रखकर, अपने स्थानीय इको-सिस्टम के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है.

14 जिलों में माइनिंग: जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के साथ साइंटिफिक विकास

झारखंड के ऐतिहासिक आधार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में माइनिंग (खनन) काफी लंबे समय से चला आ रहा है और वर्तमान में झारखंड के 14 जिलों में बड़े पैमाने पर माइनिंग एक्टिविटी होती है. लेकिन अब समय बदल चुका है.मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में हमें टेक्नोलॉजी के जरिए बेहद साइंटिफिक (वैज्ञानिक) रूप से काम करना होगा. सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि झारखंड की मूल आत्मा—’जल, जंगल और जमीन’ को पूरी तरह से संरक्षित और सुरक्षित रखते हुए, राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का देश के हित में बेहतर से बेहतर उपयोग किया जाए. इसी संतुलित और सतत विकास की सोच के साथ झारखंड देश के इंडस्ट्रीयल ग्रोथ (औद्योगिक विकास) की रीढ़ बना रहेगा, क्योंकि झारखंड के बिना देश का औद्योगिक विकास पूरा होना संभव नहीं दिखता.

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