Newswave Desk: नेपाल के प्रधानमंत्री Balen Shah को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. Supreme Court of Nepal ने उनकी सरकार के दो बड़े फैसलों पर फिलहाल रोक लगा दी है. दरअसल, सरकार ने अध्यादेश लाकर सिविल सर्विस ट्रेड यूनियनों और यूनिवर्सिटी के छात्र संगठनों को भंग करने का फैसला किया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रोक दिया है. यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब कर्मचारी और छात्र संगठन लगातार सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.
बालेन शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किया बचाव
इस बीच बालेन शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में राजनीतिक दलों के झंडों पर रोक लगाने से छात्रों और कर्मचारियों के अधिकार नहीं छिनेंगे, बल्कि इससे उनकी पेशेवर आजादी और मजबूत होगी.

उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद शिक्षा संस्थानों और सरकारी दफ्तरों में राजनीतिक दखल को खत्म करना है. उनके मुताबिक, छात्र और कर्मचारी संगठन राजनीतिक दलों के प्रभाव में काम कर रहे थे. बालेन शाह ने यह भी कहा कि सरकारी तबादले और प्रमोशन योग्यता और काम के आधार पर होने चाहिए, न कि किसी राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर. हालांकि, कर्मचारी और छात्र संगठनों ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया है.
Nepal Civil Service Employees Association के अध्यक्ष Uttam Katwal ने कहा कि पंजीकृत ट्रेड यूनियनों को राजनीतिक संगठन बताना गलत है. उन्होंने कहा, “हम किसी राजनीतिक पार्टी के संगठन नहीं हैं. हम सरकारी कर्मचारी हैं और देश की सेवा के लिए शपथ लेकर काम करते हैं.”
वहीं, छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार को छात्र संगठनों को खत्म करने के बजाय कैंपस राजनीति को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना चाहिए.
