Gumla: विद्या भारती की योजना के अंतर्गत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, डीएसपी रोड, गुमला में शनिवार को मातृ भारती के गठन हेतु कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ मातृ भारती की संरक्षिका एवं वार्ड पार्षद नूतन रानी, पूर्व आचार्या जयश्री कुजूर, मातृ भारती प्रमुख अन्नपूर्णा कुमारी तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
माता ही परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रथम संस्कारदाता होती है
अपने संबोधन में मातृ भारती की संरक्षिका नूतन रानी ने कहा कि माता ही परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रथम संस्कारदाता होती है. जब मातृशक्ति संगठित होकर समाज के हित में कार्य करती है, तब सकारात्मक परिवर्तन स्वतः दिखाई देने लगते हैं. मातृ भारती का उद्देश्य केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूक, संस्कारित एवं उत्तरदायी माताओं का सशक्त संगठन तैयार करना है. उन्होंने सभी माताओं से संगठन के माध्यम से शिक्षा, संस्कार, सामाजिक समरसता एवं सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर शिक्षा के साथ-साथ अपने सामाजिक दायित्वों का भी उत्कृष्ट निर्वहन कर रहा है जो प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है.

भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को सर्वोच्च स्थान
विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र तिवारी ने मातृ भारती की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बालक का प्रथम विद्यालय उसका परिवार और पहली गुरु उसकी माता होती है. विद्यालय एवं माताओं के समन्वित प्रयास से ही संस्कारित, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ पीढ़ी का निर्माण संभव है. मातृ भारती इसी उद्देश्य को साकार करने का प्रभावी माध्यम है. पूर्व आचार्या जयश्री कुजूर ने मातृ भारती की परिकल्पना पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है. मातृ भारती ऐसा मंच है जो परिवार, विद्यालय और समाज के बीच संस्कारों का मजबूत सेतु बनकर माताओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ता है.
मातृ भारती के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास
इस अवसर पर उपस्थित माताओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए मातृ भारती के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, परिवार में संस्कारों के संवर्धन तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम का संचालन आचार्या संगीता कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आचार्या प्रीति कुमारी ने किया. कार्यक्रम के प्रारंभ में बहन आन्या जायसवाल एवं आकांक्षा वर्मा ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भाव -विभोर कर दिया.
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