मेदिनीनगर का बड़ा तालाब बना बदहाली की मिसाल, 7.57 करोड़ खर्च, सुविधा शून्य

Palamu: मेदिनीनगर की शान कहा जाने वाला बड़ा तालाब आज सिस्टम की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है. करीब 7.57...

Palamu: मेदिनीनगर की शान कहा जाने वाला बड़ा तालाब आज सिस्टम की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है. करीब 7.57 करोड़ रुपये की भारी लागत से किया गया सुंदरीकरण अब जनता के लिए बेकार साबित हो रहा है.

खर्च के बावजूद नहीं मिली सुविधा

करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी न तो तालाब का पानी साफ हुआ और न ही आम लोगों को कोई सुविधा मिल सकी. यह स्थिति सरकारी कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

लापरवाही की खुली कहानी

यह तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि जनता के पैसे का सही उपयोग नहीं हुआ. वर्ष 2019 में जब साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत से तालाब और अंबेडकर पार्क को विकसित करने की योजना शुरू हुई थी, तब लोगों को एक बेहतर और सुंदर जगह मिलने की उम्मीद थी. लेकिन आज यहां जलकुंभी और गंदगी ही नजर आती है.

फव्वारे और ओपन जिम बने कबाड़

लाखों रुपये से लगाए गए वाटर फव्वारे अब बेकार पड़े हैं. ओपन जिम के उपकरण भी खराब होकर अपनी हालत बयां कर रहे हैं. सुंदरीकरण के तहत बनी दुकानें भी टूटकर बिखर रही हैं. पूरी परियोजना दिखावे तक सीमित रह गई है.

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गंदगी और दुर्गंध से लोग परेशान

तालाब के चारों ओर फैली जलकुंभी और गंदगी से उठती दुर्गंध ने राहगीरों की परेशानी बढ़ा दी है. नालियों का गंदा पानी बिना किसी सफाई के सीधे तालाब में गिर रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है.

रखरखाव में फेल हुआ सिस्टम

नगर निगम की ओर से रखरखाव में लापरवाही साफ दिख रही है. निर्माण के बाद इसकी देखभाल नहीं की गई, जिससे स्थिति लगातार खराब होती गई.

नगर आयुक्त ने मानी समस्या

नगर आयुक्त ने भी स्वीकार किया कि तालाब की स्थिति खराब है और इसकी मुख्य वजह नालियों का गंदा पानी है. उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए एसटीपी लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. साथ ही मत्स्य समिति के जरिए सफाई की योजना बनाई जा रही है.

सुधार की योजना पर काम जारी

नगर निगम बोर्ड की बैठक में तालाब के सुंदरीकरण, लाइटिंग और मरम्मत को लेकर चर्चा हुई है. इंजीनियरों को इसके लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इसे बेहतर बनाकर नौकायन और अन्य सुविधाओं के लिए विकसित किया जा सके.

जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल

वाटर फाउंटेन को लेकर भी कहा गया है कि इसे जरूरत के अनुसार चलाया जाता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि 7.57 करोड़ रुपये की यह योजना आखिर किसके लिए थी. जब जनता को इसका लाभ नहीं मिल रहा, तो इतने बड़े बजट का इस्तेमाल क्यों किया गया. बड़ा तालाब की यह स्थिति अब जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है.

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