Palamu: करोड़ों रुपये की लागत से बन रही उत्तर कोयल जलाशय परियोजना एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है. हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दरुआ बेनी पंचायत के पास मुख्य नहर (आरडी 84.846) पर निर्माणाधीन पुल सह सुपर पैसेज में निर्माण के करीब एक महीने बाद ही दरारें दिखाई देने का दावा किया गया है. इसको लेकर ग्रामीणों और किसानों ने गंभीर चिंता जताई है. स्थानीय लोगों ने कथित दरार का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने लगाए निर्माण में लापरवाही के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया. उनका कहना है कि ढलाई से पहले सेटरिंग के नीचे मिट्टी भरकर काम किया गया था. बाद में जब मिट्टी हटाई गई तो कुछ ही समय में पुल के ढांचे में दरारें दिखाई देने लगीं. ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने तकनीकी खामियों को दूर करने के बजाय दरारों पर केवल मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की.

स्वतंत्र तकनीकी जांच की उठी मांग
ग्रामीणों और किसानों ने किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से पुल की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं. बसपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रत्याशी शेर अली, किसान भुनेश्वर सिंह, पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी मिथिलेश कुमार सिंह तथा दरुआ पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि योगेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर कोयल जलाशय परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा साबित होने वाली है. ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है. उन्होंने दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कथित दरार का वीडियो
निर्माणाधीन पुल में कथित दरार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में यदि शुरुआती चरण में ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है.
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी एंव @dc_palamu महोदय इस – उत्तर कोयल नहर परियोजना की उच्चस्तरीय जांच हो।
मोहम्मदगंज से जपला तक हुए सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कर दोषी कंपनी, ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनता के पैसे का हिसाब चाहिए। pic.twitter.com/VqjYL5Z2IN
— आपका राहुल (@RahulSingh1907) July 6, 2026
विभाग की ओर से नहीं आई आधिकारिक पुष्टि
हालांकि, पुल में दरार और घटिया निर्माण के लगाए जा रहे आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित विभाग ने न तो पुल में दरार होने की पुष्टि की है और न ही आरोपों का खंडन किया है. ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
Also Read : झारखंड में डिजिटल शिक्षा को मिलेगा नया आयाम, हर प्रमंडल में बनेंगे आधुनिक स्टूडियो
1972 में शुरू हुई थी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना
उत्तर कोयल जलाशय परियोजना की शुरुआत वर्ष 1972 में तत्कालीन बिहार सरकार ने की थी. वर्ष 1993-94 तक बांध और अन्य निर्माण कार्य जारी रहे. वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद परियोजना का बड़ा हिस्सा झारखंड में आ गया. परियोजना के तहत मोहम्मदगंज बैराज से निकलने वाली 11.89 किलोमीटर लंबी बाईं मुख्य नहर (एलएमसी) पूरी तरह झारखंड में स्थित है, जबकि दाहिनी मुख्य नहर (आरएमसी) की कुल लंबाई 110.44 किलोमीटर है. इसमें शुरुआती 31.40 किलोमीटर झारखंड और शेष 79.04 किलोमीटर बिहार में पड़ता है. इस परियोजना का उद्देश्य पलामू और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर किसानों को लाभ पहुंचाना है.
हजारों किसानों की उम्मीदों से जुड़ी है परियोजना
उत्तर कोयल जलाशय परियोजना को पलामू प्रमंडल की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में गिना जाता है. इसके पूरा होने पर हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है. ऐसे में निर्माणाधीन पुल में दरार के दावों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में परियोजना की उपयोगिता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं. इसलिए उन्होंने सरकार से पूरे मामले की पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग दोहराई है.


