Ranchi: झारखंड को रोशन करने वाले झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के वित्तीय साम्राज्य की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो वित्तीय प्रबंधन के मोर्चे पर बड़े सवाल खड़े करती है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, निगम का कुल एसेट (संपत्ति) बेस भले ही 34,921 करोड़ रुपये को छू रहा हो, लेकिन इसके पीछे छिपे संचित घाटे और भारी-भरकम कर्ज के आंकड़े होश उड़ाने वाले हैं.

21,626 करोड़ का संचित घाटा: सबसे बड़ा वित्तीय संकट
बैलेंस शीट का सबसे चिंताजनक हिस्सा वह राशि है जो कंपनी के भारी-भरकम नुकसान को बयां करती है. सरकार और शेयरधारकों की पूंजी जून 2025 तक बढ़कर 4.83 लाख लाख रुपये की गई है. अप्रैल 2024 में यह संचित घाटा 16,976.71 करोड़ था, जो महज सवा साल में बढ़कर 21,626 करोड़ के पार पहुंच चुका है.
कुल कर्ज 22,889 करोड़: उधारी के बोझ तले दबी बिजली
निगम को चलाने और बिजली की आपूर्ति बनाए रखने के लिए ली गई उधारी और देनदारियां आसमान छू रही हैं. वित्तीय संस्थानों और अन्य स्रोतों से लिया गया लांग-टर्म लोन 13,337 करोड़ रुपये से अधिक है. रोजमर्रा के काम और तात्कालिक जरूरतों के लिए लिया गया शॉर्ट-टर्म लोन भी तेजी से बढ़कर 9552.67 करोड़ रुपये पर आ गया है. इन दोनों को मिलकार कर्ज 22,889 करोड़ के आंकड़े पर पहुंच गया हैं.
9,121 करोड़ का ट्रेड पेबल्स: बिजली कंपनियों का बकाया
बिजली उत्पादन कंपनियों (Gencos) और अन्य सप्लायर्स का बकाया बढ़कर 9,121 करोड़ हो गया है. इसके अलावा, ग्राहकों की सुरक्षा राशि के रूप में भी निगम के पास 2,33,4.73 करोड़ जमा है.
10,032 करोड़ का सरकारी अनुदान: बैसाखी पर टिका प्रबंधन
झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम को डूबने से बचाने के लिए सरकारी मदद का आंकड़ा 10,032 करोड़ तक पहुंच चुका है. यह राशि दर्शाती है कि बिना सरकारी वित्तीय बैसाखी के निगम का परिचालन लगभग असंभव हो चुका है.
फैक्ट फाइल
• 15,007.12 करोड़ (प्रॉपर्टी और प्लांट): निगम के पास 15,007.12 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति मौजूद है.
• 1,95,2.10 करोड़ प्रगति पर कार्य: बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जो काम प्रक्रिया में हैं, उनमें निवेश 1,95,2.10 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.
• 1,911.54 करोड़ (कैश बैलेंस): बैंक और नकदी के रूप में निगम के पास करीब 1,911.54 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध है.
