RANCHI: स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग ने राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. धनबाद, खूंटी, गिरिडीह और जामताड़ा के जिला अस्पतालों को अब अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेजों के रूप में अपग्रेड किया जाएगा. यह पूरी योजना केंद्र सरकार की वाइविलिटि गैप फंडिंग (वीडीएफ) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी ) मोड पर आधारित है.
परियोजना की खासियत
कुल सरकारी सहायता: केंद्र सरकार 464.23 करोड़ रुपये देगी, जबकि झारखंड सरकार अधिकतम 308.37 करोड़ रुपये का अनुदान देगी. शेष राशि का निवेश निजी पार्टनरद्वारा किया जाएगा.धनबाद, जामताड़ा और गिरिडीह के कॉलेज 5 साल में, जबकि खूंटी का कॉलेज 4 साल के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा.
आम जनता को क्या मिलेगा लाभ
- मुफ्त ओपीडी: सभी मरीजों के लिए ओपीडी सेवा पूरी तरह निशुल्क होगी.
- मुफ्त बेड : जिला अस्पताल की मौजूदा क्षमता और अतिरिक्त बेड का 20% हिस्सा गरीब मरीजों के लिए आरक्षित होगा, जहां इलाज मुफ्त मिलेगा.
- दवाएं और जांच: आवश्यक दवाएं सरकार मुफ्त देगी. नेशनल हेल्थ मिशन के तहत आने वाली जांचें भी सभी के लिए मुफ्त होंगी.
- डॉक्टरों की फौज: नए मेडिकल कॉलेज खुलने से राज्य को हर साल सैकड़ों नए डॉक्टर मिलेंगे, जिससे भविष्य में चिकित्सा संकट दूर होगा.
अलग-अलग जिलों के लिए विशेष प्रावधान
- खूंटी (आकांक्षी जिला): यहां सरकार सबसे ज्यादा मदद दे रही है. कुल लागत का 80% हिस्सा सरकार (40% केंद्र और 40% राज्य) वहन करेगी.
- गिरिडीह और जामताड़ा: यहां 60% पूंजीगत अनुदान (40% केंद्र और 20% राज्य) दिया जाएगा.
- धनबाद: यहां पहले से मेडिकल कॉलेज होने के कारण इसे ‘सब-स्कीम 1’ में रखा गया है, जिसमें 30% केंद्र और 30% राज्य की हिस्सेदारी होगी.
प्रबंधन और जिम्मेदारी
इस परियोजना के लिए अर्नेस्ट एंड यंग को तकनीकी सलाहकार नियुक्त किया गया है. निजी पार्टनर इन कॉलेजों को 60 वर्षों तक संचालित करेंगे. जिला अस्पतालों के मौजूदा कर्मचारियों को 2 साल तक ट्रांजिशन सपोर्ट के रूप में वहीं रखा जाएगा, जिसका खर्च राज्य सरकार उठाएगी.
मेडिकल सीटों का निर्धारण और आरक्षण
- सीटों की संख्या: प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या नेशनल मेडिकल कमिश्न के मानकों के अनुसार तय की जाएगी. आमतौर पर जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने पर शुरुआती तौर पर 100 सीटों का लक्ष्य रखा जाता है.
- सीटों का वर्गीकरण: पीपीपी मॉडल के तहत सीटों को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा. सरकारी कोटा’ और मैनेजमेंट/ओपन कोटा. हालांकि, सटीक अनुपात राज्य की आरक्षण नीति और निविदा की अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगा.
- आरक्षण नीति: झारखंड सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति इन कॉलेजों की सरकारी सीटों पर लागू होगी, जिससे राज्य के मेधावी और आरक्षित वर्ग के छात्रों को लाभ मिल सके.
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फीस का निर्धारण (Fee Structure)
- फीस नियामक समिति : मेडिकल शिक्षा की फीस का निर्धारण एक विशेष समिति करेगी, जो एनएमसी के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखेगी.
- वीजीएफ का प्रभाव: सरकार इन कॉलेजों को बनाने के लिए भारी अनुदान (वीजीएफ) दे रही है, इसलिए फीस निर्धारण के समय इस सरकारी मदद को ध्यान में रखा जाएगा ताकि छात्रों पर ज्यादा बोझ न पड़े.
निजी पार्टनर के चयन की प्रक्रिया
- निजी पार्टनर का चयन एक पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से किया जाएगा.
- नीति आयोग के ‘मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट’ के आधार पर निविदा दस्तावेज तैयार किए जाएंगे.
- चयन का मुख्य आधार ‘न्यूनतम अनुदान’ होगा. यानी, जो अनुभवी कंपनी सरकार से सबसे कम वित्तीय सहायता मांगेगी और बेहतर सुविधाएं देने का वादा करेगी, उसे ही काम सौंपा जाएगा.
- पार्टनर का चयन करने से पहले उसकी वित्तीय क्षमता और स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले अनुभवों की कड़ी जांच ट्रर्जेक्शन एडवाइजर द्वारा की जाएगी.
निजी पार्टनर की जिम्मेदारियाँ:
- मेडिकल कॉलेज का डिजाइन, निर्माण और फंडिंग करना.
- 60 वर्षों तक अस्पताल और कॉलेज का संचालन और रखरखाव करना.
- जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को तय मानकों के अनुसार मुफ्त इलाज मुहैया कराना.
- सरकार मौजूदा जिला अस्पताल को जैसा है जहां है के आधार पर सौंपेगी.
- मेडिकल कॉलेज के लिए आवश्यक जमीन सरकार द्वारा 1 रुपए वार्षिक लीज रेंट पर उपलब्ध कराई जाएगी.
