60 दिन बाद भी नहीं मिला इंसाफ, सड़क पर उतरे ग्रामीण, पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप

Hazaribagh: जिले के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत पसई गांव में सोमवार को उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब इंसाफ की मांग...

Hazaribagh: जिले के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत पसई गांव में सोमवार को उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब इंसाफ की मांग को लेकर मृतक राजेश साव के परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया. लगभग दो महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले राजेश साव के परिजन पिछले 60 दिनों से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों और पुलिस थाने के चक्कर काट रहे हैं.

पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है, जिसमें कटकमदाग पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास कर रही है. सड़क जाम के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई.

एक्सीडेंट के दावे को परिजनों ने नकारा

रोड जाम पर बैठी मृतक राजेश साव की पत्नी और उनके बड़े बेटे ने रोते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. मृतक के बेटे ने बताया कि जिस सड़क पर घटना हुई, वहां वाहन 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अधिक नहीं चल सकते.

उन्होंने बताया कि जब उनके पिता का शव मिला, तो उनका चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था, आंखें बाहर निकली हुई थीं, जबकि हाथ-पैर में दुर्घटना जैसी कोई चोट नहीं थी. हाथों पर किसी के नाखूनों के गहरे निशान थे.

परिजनों ने मामले के जांच अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वे थाने जाते हैं, तो जांच अधिकारी सीधे कह देते हैं कि नामजद लोग आरोपी नहीं हैं.

मृतक के बेटे ने कहा कि वे न्याय के लिए हजारीबाग एसपी और डीएसपी तक गुहार लगा चुके हैं. वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से फोन भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद कटकमदाग पुलिस मामले को दबाने में जुटी हुई है.

वार्ड संख्या 7 के सदस्य जगदीश राम सहित कई ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि आरोपियों को बचाने के लिए पर्दे के पीछे साठगांठ की गई है, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है.

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गिरफ्तारी और मुआवजे का वादा निकला खोखला

मृतक की पत्नी ने बताया कि घटना के समय जब शव सड़क पर था, तब थाना प्रभारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शन शांत कराने के लिए कई बड़े वादे किए थे.

प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि तीन दिनों के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा. साथ ही पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा, एक सरकारी नौकरी, तीन छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी, प्रति माह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता, सरकारी आवास और पेंशन देने का भी वादा किया गया था.

लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन का कोई आश्वासन धरातल पर नहीं उतरा है. परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि घर में कमाने वाले एकमात्र सदस्य राजेश साव ही थे.

मृतक की पत्नी ने कहा कि प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जिसके कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव और भय के माहौल में जीने को मजबूर है.

उच्चस्तरीय जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण

सड़क जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा. इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारी महिलाओं एवं युवाओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई.

पुलिस अधिकारियों ने जब ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और कहा कि सड़क जाम से आम लोगों को परेशानी हो रही है, तो प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि अन्य मामलों में पुलिस तीन दिनों के भीतर कार्रवाई कर देती है, लेकिन इस मामले में दो महीने बाद भी कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया.

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कहा कि उन्हें अब स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है. पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की किसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है.

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी और मुआवजे को लेकर लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा.

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