Ranchi: रिम्स में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद पर हुई नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपना पक्ष जांच अधिकारियों के समक्ष रख दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि संबंधित नियुक्ति संस्थान के नियमों और शासी परिषद के अधिकारों के तहत की गई है तथा इसमें किसी प्रकार की प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है.
नियुक्ति के बाद मामला चर्चा में आया
गौरतलब है कि मार्च 2026 में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद पर ऋषभ कुमार की नियुक्ति हुई थी. नियुक्ति के बाद यह मामला चर्चा में आया क्योंकि ऋषभ कुमार, रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के पुत्र हैं. कुछ लोगों ने नियुक्ति प्रक्रिया और पद सृजन को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी प्रमंडलीय आयुक्त को सौंप दी. जांच के दौरान निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा गया था. अपने जवाब में उन्होंने कहा कि रिम्स एक स्वायत्तशासी संस्थान है, जिसे कानून के तहत विशेष अधिकार प्राप्त हैं. संस्थान की शासी परिषद को विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है, जिसमें नए पाठ्यक्रम शुरू करना और आवश्यक पदों का सृजन करना भी शामिल है.

स्वास्थ्य विभाग ऑर प्रशासन की नजर
डॉ. राजकुमार ने अपने पक्ष में यह भी कहा कि रिम्स में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन से संबंधित पाठ्यक्रम बाद में शुरू किया गया था और इसके संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन को शासी परिषद की मंजूरी प्राप्त थी. इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित पद का निर्माण किया गया और नियुक्ति की कार्रवाई पूरी की गई. दूसरी ओर, नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि संबंधित पद के सृजन और नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता की गहन जांच होनी चाहिए. उनका आरोप है कि पद सृजन और नियुक्ति से जुड़े कुछ पहलुओं पर अभी भी सवाल बने हुए हैं. फिलहाल पूरा मामला प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर जांचाधीन है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी या नहीं. स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की नजर इस मामले पर बनी हुई है.
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