Ranchi: JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों ने मोर्चा खोल दिया है.नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारी सरकार के निर्णय पर नाराजगी जाता रहे हैं और उनका कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद नौकरी हासिल की है, इसलिए बिना स्पष्ट लिखित आदेश के उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़ा करना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
‘मौखिक आदेश नहीं मानेंगे’
प्रदर्शन कर रहे नवनियुक्त कर्मियों ने साफ कहा कि वे किसी भी मौखिक निर्देश को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि सरकार यदि JSSC CGL रद्द करने का फैसला ले चुकी है, तो उसका स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करे. अभ्यर्थियों ने कहा कि इसके बाद वे पूरे मामले को कानूनी तरीके से अदालत के सामने रखेंगे. उनका दावा है कि नियुक्ति नियमों के अनुसार हुई है और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक रास्ता अपनाएंगे.
‘गड़बड़ी हुई तो दोषियों पर कार्रवाई हो’
नवनियुक्त पदाधिकारियों का कहना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. उनका सवाल है कि कुछ लोगों की कथित गलती की सजा उन अभ्यर्थियों को क्यों मिले, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की और नियुक्ति पाई? उन्होंने कहा कि कई चयनित कर्मी पिछले कई महीनों से अलग-अलग सरकारी विभागों में काम भी कर रहे हैं. ऐसे में परीक्षा रद्द होने के फैसले से उनके सामने नौकरी और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है.
आंदोलन के दबाव में फैसला लेने का आरोप
प्रदर्शनकारी कर्मियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों के आंदोलन के दबाव में आकर परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा को रद्द करने के लिए ठोस कारण और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है. उनका कहना है कि यदि सरकार के पास परीक्षा रद्द करने के पर्याप्त आधार हैं तो उसे सार्वजनिक किया जाए और संबंधित आदेश अदालत के सामने रखा जाए.
अब सड़क से अदालत तक संघर्ष की तैयारी
नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे अपने रोजगार और नियुक्ति को बचाने के लिए अब कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. उनका कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया में अपना समय, मेहनत और पैसा लगाया है और योग्यता के आधार पर नौकरी हासिल की है. उन्होंने दोहराया कि दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी भर्ती प्रक्रिया में सफल हुए अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है.
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