– दोपहर में पुआ-चावल खाने और भीषण गर्मी में टंकी का खौलता पानी पीने से बिगड़ी तबीयत
Garhwa : जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में फूड प्वाइजनिंग और भीषण गर्मी के बीच छत की टंकी का खौलता पानी पीने के कारण 100 से अधिक छात्राएं गंभीर रूप से बीमार हो गईं. कुल 300 छात्राओं वाले इस आवासीय विद्यालय में कुप्रबंधन का आलम यह था कि घटना के वक्त हॉस्टल पूरी तरह से सिर्फ एक गार्ड के भरोसे था. मौके से न तो वार्डन मौजूद थीं और न ही एकाउंटेंट.

मामले को दबाने की कोशिश, घंटो बंद रहा हॉस्टल का दरवाजा:
आरोप है कि शुक्रवार शाम से ही छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन विद्यालय प्रबंधन मामले को दबाने में जुटा रहा. जब बच्चियों की हालत बेहद खराब होने लगी और इसकी भनक लगते ही बदहवास अभिभावक हॉस्टल पहुंचे, तो प्रबंधन ने संवेदनहीनता दिखाते हुए मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. परिजनों को अपनी ही कराहती बच्चियों से मिलने के लिए मुख्य द्वार पर घंटों गिड़गिड़ाना और हंगामा करना पड़ा. बाद में स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय थाना प्रभारी को हस्तक्षेप करना पड़ा.पुलिस की कड़ाई और दखल के बाद आखिरकार हॉस्टल का दरवाजा खोला गया.
दोपहर के भोजन के बाद शुरू हुआ उल्टी-दस्त:
अस्पताल में भर्ती पीड़ित छात्राओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि शुक्रवार की दोपहर उन्हें छात्रावास में खाने के लिए पुआ’ और चावल दिया गया था. मुहर्रम के त्योहार को लेकर क्षेत्र में बिजली गुल थी. भीषण गर्मी के कारण छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का पानी उबल रहा था. प्यास बुझाने के लिए छात्राओं को वही खौलता हुआ गर्म पानी पीना पड़ा इसके बाद शाम को मुरही खाने के बाद भी उन्हें पीने के लिए साफ या ठंडा पानी नसीब नहीं हुआ. शाम ढलते-ढलते एक-एक कर छात्राओं के पेट में तेज दर्द, उल्टी और सिर चकराने की शिकायत होने लगी. स्कूल परिसर में जेनरेटर की व्यवस्था है, लेकिन पानी की मोटर चलाने या पंखे चलाकर हमें राहत देने के लिए इसका उपयोग नहीं किया गया. इस भयंकर कुप्रबंधन की वजह से हॉस्टल की लगभग 75 प्रतिशत छात्राएं बीमार महसूस कर रही हैं.
देर रात अस्पताल पहुंचे अधिकारी, 20 की हालत नाजुक:
देर रात लगभग नौ बजे जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तब जाकर बीमार छात्राओं को आनन-फानन में इलाज के लिए भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया. अस्पताल में 20 से अधिक छात्राओं की स्थिति नाजुक बनी हुई है. घटना की सूचना मिलते ही भवनाथपुर बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी शंभू राम अविलंब भवनाथपुर अस्पताल पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने खुद मोर्चा संभालते हुए डॉक्टरों को मुस्तैद किया और पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.


