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पलामू : टेंडर रद्द कर राजस्व बढ़ाने का दावा, पुराने कार्यों की गुणवत्ता पर भी दें जवाब : रंजन कुमार दुबे

Palamu : मेदिनीनगर नगर निगम की महापौर अरुणा शंकर द्वारा टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और निगम का राजस्व बढ़ाने संबंधी दिए...

रंजन कुमार दुबे

Palamu : मेदिनीनगर नगर निगम की महापौर अरुणा शंकर द्वारा टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और निगम का राजस्व बढ़ाने संबंधी दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 20 सूत्री अध्यक्ष रंजन कुमार दुबे ने कहा कि अगर वास्तव में पारदर्शिता और जनहित महापौर की सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो उनके कार्यकाल में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता पर भी जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए. रंजन कुमार दुबे ने कहा कि महापौर महोदया बताएं कि चैनपुर पंचायत भवन के पीछे करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पार्क की वर्तमान स्थिति क्या है? अगर निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया था, तो आज उसकी गुणवत्ता पर लगातार सवाल क्यों उठ रहे हैं? इसी प्रकार मुख्य सड़क के किनारे लगाई गई स्ट्रीट लाइटों और बिजली के पोलों की हालत भी कुछ ही समय में खराब क्यों हो गई? कई स्थानों पर लाइटें बंद हैं, जबकि कई जगह बिजली के पोल टेढ़े हो चुके हैं. आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है.

कार्यों के गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई

उन्होंने कहा कि महापौर अपने बयान में राजस्व वृद्धि और पारदर्शिता की बात कर रही हैं, लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि उनके कार्यकाल में जिन कार्यों को स्वीकृति दी गई, उनकी गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई. अगर किसी निर्माण कार्य में कमी पाई गई है, तो संबंधित संवेदकों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई.

कुछ संवेदकों को प्राथमिकता मिलने की चर्चा

रंजन कुमार दुबे ने कहा कि शहर में लंबे समय से कुछ संवेदकों को विशेष प्राथमिकता मिलने की चर्चाएं होती रही है. अगर ऐसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं, तो महापौर स्वयं आगे आकर सभी तथयों को सार्वजनिक करें और स्पष्ट करें कि सभी टेंडर एवं कार्य पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हुए है. अगर कहीं भी अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.

राजस्व बढ़ाने से पारदर्शिता सिद्ध नहीं होती

उन्होंने कहा कि सिर्फ नए टेंडर रद्द करने या निगम का राजस्व बढ़ाने का दावा कर देने से पारदर्शिता सिद्ध नहीं होती. पारदर्शिता का वास्तविक अर्थ यह है कि पहले कराए गए कार्यों की गुणवत्ता, जनता के पैसे का सही उपयोग और दोषियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो. जनता जानना चाहती है कि जिन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, उनकी स्थिति आज बदहाल क्यों है.

पुराने निमार्ण कार्यों की जांच हो

20 सूत्री अध्यक्ष, प्रखंड चैनपुर रंजन कुमार दुबे ने महापौर से मांग की कि अगर वे वास्तव में पारदर्शिता की पक्षधर है, तो पुराने निर्माण कार्यों की भी तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जहां कहीं भी लापरवाही या अनियमितता सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों एवं संवेदकों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की जाए. जनता को केवल दावे नहीं, बल्कि जवाब और परिणाम चाहिए.

 

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