Newswave Desk: लोकसभा ने बुधवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन बिल, 2026 को ध्वनिमत से पास कर दिया. हालांकि, बिल पर चर्चा के दौरान सदन में विपक्ष के हंगामे की वजह से कई बार शोर-शराबा भी हुआ. बिल पर करीब आठ घंटे तक चर्चा चली. इस दौरान विपक्ष और सत्तारूढ़ NDA के सांसदों ने अपने-अपने पक्ष रखे. लेकिन बाद में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगाया, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया.
राहुल गांधी के आरोपों का BJP ने कड़ा विरोध किया. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने बिना तथ्यों के आरोप लगाए हैं और उन्हें संसदीय परंपराओं की जानकारी नहीं है. डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में तुरंत कार्रवाई की थी. उन्होंने कहा कि 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद अब तक 52 FIR दर्ज की जा चुकी हैं.
बिल में क्या है नया प्रावधान?
संशोधन बिल के अनुसार, पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. परीक्षा में पेपर लीक या अन्य अनुचित तरीकों में शामिल दोषियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल की सजा हो सकती है. इसके अलावा 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा.
अगर मामला संगठित अपराध से जुड़ा है, तो दोषियों को कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस महत्वपूर्ण बिल पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की.
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