ऐतिहासिक रथ यात्रा को लेकर तैयारी शुरू- मंत्रोच्चारण, शंख, घंट एवं जयकारे के साथ रथ निर्माण शुरू

Ranchi: अक्षय तृतीया के मौके पर राजधानी रांची के जगन्नाथपुर में होने वाली ऐतिहासिक रथ यात्रा की तैयारी शुरू हो चुकी है....

Ranchi: अक्षय तृतीया के मौके पर राजधानी रांची के जगन्नाथपुर में होने वाली ऐतिहासिक रथ यात्रा की तैयारी शुरू हो चुकी है. आपको बताते चलें कि आगामी 16 जुलाई को रथ मेला शुरू होगा. इसी को लेकर आज मंत्रोच्चारण, शंख, घंट एवं जयकारों के साथ रथ निर्माण का कार्य विधिवत शुरू किया गया.

रथ निर्माण की परंपरा

रथ का निर्माण आम, शाल, जामुन एवं नीम की लकड़ियों से किया जाता है. आज जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष अशोक नरसरिया और मंदिर के प्रथम सेवक (सेवाइत) ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने पूजा-अर्चना के साथ रथ निर्माण की शुरुआत की. लगभग 320 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इसी दिन रथ निर्माण कार्य शुरू होता है.

धार्मिक मान्यता और यात्रा का महत्व

इस रथ पर सवार होकर महाप्रभु जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भाई बलभद्र स्वामी मौसी बाड़ी के लिए प्रस्थान करते हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को रथ यात्रा प्रारंभ होती है.

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मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

जगन्नाथपुर मंदिर के इतिहास की बात करें तो 1691 ईस्वी में ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव ने प्रभु जगन्नाथ मंदिर की स्थापना की थी. तब से आज तक उत्कल की परंपरा, पूजा पद्धति और अनुष्ठान लगातार निभाए जा रहे हैं. रथ का निर्माण विधि-विधान के अनुसार पुरी से आए कारीगर और स्थानीय कारीगर मिलकर करते हैं.

आगामी अनुष्ठानों का कार्यक्रम

29 जून को महा ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर देव स्नान अनुष्ठान होगा, जिसमें बलभद्र स्वामी, सुभद्रा और महाप्रभु जगन्नाथ को गर्भगृह से स्नान मंडप लाया जाएगा और 51-51 मिट्टी के कलश से स्नान कराया जाएगा. इसके बाद भगवान के अस्वस्थ होने की मान्यता के चलते उन्हें एकांतवास में रखा जाएगा, जहां आम श्रद्धालुओं और पुजारियों का प्रवेश वर्जित रहेगा.

नेत्रदान और रथ यात्रा

15 जुलाई को दर्शन मंडप में भव्य श्रृंगार और नेत्रदान महोत्सव का आयोजन होगा. इसके अगले दिन 16 जुलाई को महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर मौसी बाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे. इस दौरान 10 दिनों तक रथ मेला आयोजित होगा, जबकि 25 जुलाई को घूरती मेला आयोजित किया जाएगा.

तैयारियों में जुटा प्रशासन और समिति

मंदिर प्रबंधन समिति तैयारियों में जुट चुकी है. प्रथम सेवक ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने कहा कि यह ऐतिहासिक रथ मेला झारखंड का गौरव है. इसे भव्य बनाने के लिए श्रद्धालुओं और जिला प्रशासन से सहयोग अपेक्षित है. उन्होंने बताया कि मेले में मिलने वाले उत्पाद झारखंडी संस्कृति से जुड़े होंगे.

सुरक्षा और व्यवस्था पर जोर

उन्होंने यह भी कहा कि मेले में लाखों की भीड़ उमड़ती है, इसलिए सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है, ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके

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