खजाने में सेंधमारी: अब बैंकों पर भी कसेगा शिकंजा, अमिताभ कौशल कमेटी खंगालेगी लूपहोल्स

Ranchi: सरकारी खजाने से वेतन के नाम पर हुई करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी के मामले में राज्य सरकार ने अब तक...

Ranchi: सरकारी खजाने से वेतन के नाम पर हुई करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी के मामले में राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार किया है. महालेखाकार की रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद गठित उच्चस्तरीय जांच समिति को सरकार ने न सिर्फ खुली छूट दे दी है, बल्कि इसका दायरा बढ़ाते हुए नए टर्म्स ऑफ रेफरेंस भी तय कर दिए हैं. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अगुवाई में चल रही इस जांच के रडार पर अब केवल दागी अफसर और कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वे बैंक भी आ गए हैं जिनकी नाक के नीचे से यह पूरा खेल खेला गया.

डिजिटल सिस्टम में सेंधमारी, सॉफ्टवेयर की खामियों पर वार

इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे तकनीकी और चौंकाने वाला पहलू वह सॉफ्टवेयर है, जिसके भरोसे सरकारी वित्तीय लेनदेन सुरक्षित माना जाता था. सरकार ने कमेटी को विशेष तौर पर उस तकनीकी लूपहोल या सॉफ्टवेयर की खामी को चिन्हित करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसका फायदा उठाकर जालसाजों ने सिस्टम को बाईपास किया. यह केवल एक वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान है.

बैंकों की भूमिका पर उठे सवाल

नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जांच समिति अब यह बारीकी से परखेगी कि बिना पुख्ता वेरिफिकेशन के बैंकों से इतनी बड़ी राशि कैसे निकाल ली गई? क्या बैंकिंग नियमों को जानबूझकर ताक पर रखा गया या फिर इसमें बैंक कर्मियों की भी परोक्ष भूमिका थी?

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जांच के बिंदु

• बैंकों की जवाबदेही: अवैध निकासी के दौरान संबद्ध बैंकों के स्तर पर नियमों का कितना उल्लंघन हुआ.
• सिस्टम की कमजोरी: सॉफ्टवेयर की वह कौन सी तकनीकी खामी थी, जिसने इस फर्जीवाड़े को मुमकिन बनाया.
• जिम्मेदारों की पहचान: इस खेल में सीधे तौर पर या पर्दे के पीछे से शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को बेनकाब करना.
• तरीके का खुलासा: फर्जी निकासी के लिए अपनाए गए पूरे रूट और मॉड्यूल ऑपरेंडी (तरीके) को डिकोड करना.

रिकवरी का मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी

आईएएस अमिताभ कौशल समिति को यह कड़ा जिम्मा भी दिया गया है कि वह फर्जी तरीके से निकाली गई राशि की पाई-पाई वसूलने और उसे दोबारा सरकारी खजाने में सुरक्षित जमा कराने का पूरा रोडमैप तैयार करे. इसके साथ ही, भविष्य में कोई दोबारा सरकारी खजाने की तरफ आंख उठाने की हिम्मत न कर सके, इसके लिए कड़े प्रशासनिक और अभेद्य तकनीकी उपायों के सुझाव भी मांगे गए हैं.

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