जैसे-जैसे जानकारी बढ़ी सरकारी कर्मियों ने शुरू किया होम लोन लेना, पिछले वित्त वर्ष में 350 करोड़ सरकार ने बांटा, बेधड़क हो रहा दूसरे प्रोजेक्ट में निवेश, वित्त विभाग के पास घपले को पकड़ने का कोई मैकेनिजम नहीं (2)

Akshay Kumar Jha Ranchi: सरकारी कर्मियों को घर बनाने या फ्लैट खरीदने में कोई परेशानी ना हो, इस उद्देश्य से सरकार की...

Akshay Kumar Jha

Ranchi: सरकारी कर्मियों को घर बनाने या फ्लैट खरीदने में कोई परेशानी ना हो, इस उद्देश्य से सरकार की तरफ से कर्मियों को साठ लाख रुपए का लोन मात्र 7.5% की ब्याज दर पर दिया जाने लगा. 2024 से पहले यह रकम तीस लाख रुपए थी. वित्त विभाग के कमजोर प्रबंधन की वजह से सरकारी कर्मी यह लोन लेकर आवास ना बनाकर दूसरे प्रोजेक्टों में निवेश करने लगे. निवेश से उन्हें मोटी आमदनी होने लगी. लोन के एवज में सरकार की तरफ से मामूली सा रकम सरकारी कर्मियों के वेतन मद से किस्त के तौर कटता है. जिससे शायद ही कर्मियों को कोई फर्क पड़े.

2024 से पहले काफी कम सरकारी कर्मियों को इस बात की जानकारी थी. लेकिन 2024 के बाद जब लोन की रकम साठ लाख रुपए हो गयी तो बहुत सारे लोगों ने लोन के लिए आवेदन देना शुरू कर दिया. आलम यह हुआ कि 2025-2026 में 350 करोड़ से ज्यादा की रकम वित्त विभाग की तरफ से लोन के एवज दिया गया.

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चार सालों में 600 करोड़ का दिया गया लोन

NewsWave Jharkhand के पास पिछले चार सालों का लेखा-जोखा है. 2022-2023 में जब लोन की रकम तीस लाख रुपए थी, तो सरकारी कर्मियों को करीब 37 करोड़ का लोन दिया गया. 2023-2024 में लोन का रकम और कम होकर करीब 30 करोड़ हो गयी. लेकिन 2024 के फरवरी के महीने में जैसे ही लोन की रकम सरकार की तरफ से बढ़ाकर साठ लाख रुपए कर दी गयी. अचानक से लोन लेने वालों की संख्या में इजाफा हुआ और 2024-2025 के वित्त वर्ष में करीब 168 करोड़ की राशी लोन के एवज में सरकारी कर्मियों के बीच बंटा.

वहीं 2025-2026 में यह रकम बढ़कर 350 करोड़ से ज्यादा का हो गया. इतने सस्ते ब्याज पर लोन लेना एक लॉटरी लगने सा हो गया. सिर्फ 7.5% ब्याज पर भला साठ लाख का लोन कौन लेना पसंद नहीं करेगा. वो भी तब, जब यह पैसा कहीं भी निवेश कर सकते हैं. क्योंकि वित्त विभाग के पास कोई मैकेनिजम ही नहीं है कि वो जान पाए कि आप इस होम लोन से आवास बना रहे हैं, या फिर व्यापार में निवेश कर रहे हैं.

प्राइवेट या PSU बैंकों से लोन लेना होता है बोझिल

अगर कोई व्यक्ति प्राइवेट बैंक या पीएसयू बैंक के पास लोन लेने के लिए जाता है, तो उसे ब्याज साधारण दर पर नहीं बल्कि चक्रवृद्धि दर देना होता है. साथ ही बैंक वाले अकसर आवास बनने वाले साइट पर आकर निरीक्षण करते हैं. जैसे-जैसे आवास बनता है, वैसे-वैसे लोन की राशी ग्राहक को दी जाती है. एक प्राइवेट बैंक कर्मी के बड़े अधिकारी ने बताया कि अगर वो अपने बैंक से होम लोन साठ लाख रुपए देते हैं, तो ग्राहक से बीस साल में लोन की रकम से दोगुना वसूल लिया जाता है. जबकि वित्त विभाग की तरफ से जो लोन सरकारी कर्मियों को मिल रहा है, उसकी बेहद मामूली ब्याज दर पर वसूली की जाती है. इससे सरकारी कर्मियों को काफी राहत मिलती है.

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