Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति के एक महत्वपूर्ण मामले में मृतक श्रमिक की विधवा को बड़ी राहत देते हुए लेबर कोर्ट के 2014 के अवार्ड में संशोधन किया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है और इसके प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए. कोर्ट ने बीमा कंपनी को मुआवजे में देरी पर दुर्घटना की तारीख 26 मई 2012 से ब्याज, 50 प्रतिशत पेनाल्टी तथा 5,000 रुपये अंतिम संस्कार खर्च देने का आदेश दिया.
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने सुनाया फैसला
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने यह फैसला सुदामा देवी बनाम अमजद नबीब खान एवं अन्य मामले में सुनाया. पीड़ित परिजन ने देवघर श्रम न्यायालय द्वारा 31 अक्टूबर 2014 को पारित अवार्ड में संशोधन की मांग की थी, दरअसल मृतक लक्ष्मण मंडल 26 मई 2012 को ट्रक से स्टोन चिप्स उतारने जा रहे थे, इसी दौरान ट्रक पलट गया. जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इस संबंध में बेंगाबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई और चालक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. मृतक की पत्नी ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति के तहत दावा दायर किया था. लेबर कोर्ट ने 5,83,270 रुपये का मुआवजा तो दिया, लेकिन पेनाल्टी, ब्याज की प्रारंभिक तिथि और अंतिम संस्कार खर्च पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया.
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