Saraikela: गम्हरिया प्रखंड के आसंगी गांव में जियाडा को भूमि हस्तांतरण किए जाने के विरोध में ग्रामीण सड़क पर उतर आए हैं. वार्ड नंबर 25 के जगन्नाथ मंदिर परिसर में ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसके बाद उन्होंने भूमि हस्तांतरण का पुरजोर विरोध किया.
ग्रामीणों का कहना है कि मौजा आसंगी, खाता संख्या 342, प्लॉट संख्या 276 की 4.42 एकड़ अनाबाद भूमि पर पिछले 3 वर्षों से ग्रामीणों के सहयोग से भव्य जगन्नाथ मंदिर का निर्माण हो रहा है. इस निर्माण में आसंगी के साथ बोरगिडी, बनडीह, कृष्णापुर, पार्वतीपुर, ईटागढ़ और बासुड़दा गांवों के लोग भी शामिल हैं.
ग्रामीणों ने जताया विरोध
पितोवास प्रधान ने बताया कि ग्रामीणों की आम सभा की सहमति के बिना उपायुक्त के आदेश से इस जमीन में से 2.22 एकड़ भूमि जियाडा के नाम हस्तांतरित कर दी गई है. जियाडा यहां 500 बेड का महिला छात्रावास बनाना चाहती है.
तालाब प्रदूषित होने की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित छात्रावास के नीचे लगभग 9 एकड़ का रैयती तालाब है. यह क्षेत्र का एकमात्र तालाब है. गर्मी में पशुओं के पीने और लोगों के नहाने-धोने के काम आता है. इसी में मनसा, काली और दुर्गा पूजा की मूर्तियों का विसर्जन भी होता है. 500 बेड के छात्रावास का सीवेज सीधे तालाब में जाएगा, जिससे तालाब प्रदूषित होकर नष्ट हो जाएगा.
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आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि 60 के दशक में भी औद्योगिक विकास के लिए जमीन दी गई थी, लेकिन क्षेत्र को न सड़क मिली, न नाला और न सीवेज की सुविधा. सड़कें आज भी जर्जर हैं. बैठक में मौजूद सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि इस जमीन पर केवल जगन्नाथ मंदिर और गार्डन बनेगा, किसी अन्य निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अगर प्रशासन ने हस्तांतरण वापस नहीं लिया, तो ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है.
