धीरज कुमार

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की साख और कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच जेल में बंद JPSC की पूर्व प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के सामने दिए गए बयान में ऐसा खुलासा किया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों और छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है. श्वेता गुप्ता ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए परीक्षा संचालन का टेंडर विवादित एवं दागी कंपनी TDPL को सौंपने का पूरा ठीकरा JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते पर फोड़ा है. श्वेता गुप्ता ने साफ शब्दों में कबूला है कि दागी और ब्लैकलिस्टेड पृष्ठभूमि वाली कंपनी TDPL को परीक्षा संचालन का काम देने में उनकी कोई व्यक्तिगत या प्रशासनिक भूमिका नहीं थी. उन्होंने दावा किया कि टेंडर आवंटन की पूरी प्रक्रिया को बेहद नियम-विरुद्ध और गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया था. इस पूरी गोपनीय सौदेबाजी और टेंडर सौंपने के खेल में सबसे अहम, निर्णायक और मुख्य भूमिका तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की थी. टेंडर आवंटन का पूरा खेल पीछे से रचने के बाद एल. ख्यांग्ते के सीधे निर्देशों और आदेशों के तहत ही श्वेता गुप्ता ने महज एक औपचारिकता पूरी करते हुए कंपनी के साथ एग्रीमेंट पेपर्स पर हस्ताक्षर किए थे.
24 से ज्यादा आरोपियों को CID कर चुकी है गिरफ्तार
इस कबूलनामे ने संस्थागत भ्रष्टाचार की जड़ों को पूरी तरह से उधेड़ कर रख दिया है. CID अब श्वेता गुप्ता के इस विस्फोटक बयान के आधार पर एल. ख्यांग्ते की भूमिका की गहराई से वित्तीय और प्रक्रियात्मक जांच कर रही है. बता दें कि इस केस से जुड़े अब तक 24 से ज्यादा आरोपियों को CID गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें इस पुरे घोटाले का मास्टरमाइंड अभय तिवारी, एल. ख्यांग्ते, श्वेता गुप्ता, सुमन सौरभ समेत अन्य लोग शामिल है. CID ने गिरफ्तार किये गए सभी आरोपियों के खिलाफ 1000 पन्नो की केस डायरी भी कोर्ट में जमा की है.

