Ranchi: झारखंड गठन के बाद से अब तक करीब 600 से अधिक छोटे-बड़े अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जा चुके हैं. जांच एजेंसियों की सक्रियता ने सफेदपोशों में डर तो पैदा किया है, लेकिन जब तक सिस्टम में पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही नहीं बढ़ेगी, तब तक रिश्वतखोरी का यह काला खेल जारी रहने की आशंका बनी रहेगी. पेश है न्यूज वेभ की एक खास रिपोर्ट…
भ्रष्टाचार की रडार पर टॉप 10 विभाग
• राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग
यह विभाग भ्रष्टाचार की सूची में शीर्ष पर है. यहां जमीन की मापी और म्यूटेशन के नाम पर सबसे अधिक ट्रैप (रंगे हाथ गिरफ्तारी) होते हैं. औसतन हर महीने 2 से 3 राजस्व कर्मचारी या अंचल अधिकारी एसीबी की गिरफ्त में आते हैं.
• ग्रामीण विकास विभाग
मंत्री के पीएस के घर से मिली 32 करोड़ रुपये की नकदी ने इस विभाग की पोल खोल दी. यहां ‘तीन प्रतिशत कमीशन’ का खेल जगजाहिर हो चुका है, जिसमें टेंडर आवंटन के लिए मोटी रकम ली जाती है.
• गृह विभाग
केस डायरी मैनेज करने, अपराधियों को बचाने या थानों में पैरवी के नाम पर यहां भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं. हाल के वर्षों में कई थानेदार और डीएसपी स्तर के अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में रडार पर आए हैं.
• पंचायती राज विभाग
मुखिया और पंचायत सचिवों के माध्यम से होने वाली 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में भारी बंदरबांट देखी गई है. यहां बिना ‘कट मनी’ के काम शुरू होना मुश्किल माना जाता है.
• ग्रामीण कार्य विभाग
सड़कों और पुलों के निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग और फर्जी मस्टर रोल के जरिए भुगतान इस विभाग की मुख्य समस्या है. वीरेंद्र राम जैसे इंजीनियरों की गिरफ्तारी इसी विभाग के काले सच का हिस्सा है.
• पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
‘नल से जल’ योजना और पाइपलाइन बिछाने के कार्यों में टेंडर घोटाले के कई मामले सामने आए हैं. यहां बड़े ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं.
• शिक्षा एवं साक्षरता विभाग
पारा शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूल भवन निर्माण और मध्याह्न भोजन के फंड में अनियमितताओं के मामले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं.
• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
दवाओं की खरीद, अस्पतालों के रखरखाव और नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. हाल ही में कई जिलों के सिविल सर्जन कार्यालयों में वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं.
• उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग
शराब सिंडिकेट और राजस्व चोरी के मामलों में इस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. यहां निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियों में बदलाव के आरोप भी लगे हैं.
• कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग
छात्रवृत्ति वितरण और आंगनवाड़ी केंद्रों के राशन में घोटाले इस विभाग की छवि को धूमिल करते रहे हैं. गरीबों के हक का पैसा बिचौलियों के हाथों में जाने की शिकायतें सबसे ज्यादा यहीं से आती हैं.
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