CM ने सहायक आचार्यों और पर्यवेक्षिकाओं को सौंपा नियुक्ति पत्र, कहा – सिर्फ वेतन नहीं, राज्य के समग्र विकास के लिए काम करें शिक्षक

Ranchi : झारखंड में युवाओं को रोजगार देने और राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में सोमवार को...

Ranchi : झारखंड में युवाओं को रोजगार देने और राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में सोमवार को एक और बड़ा कदम उठाया गया. राजधानी रांची के प्रोजेक्ट भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 319 सहायक आचार्यों और 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कर्मियों को बधाई देते हुए उन्हें एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति महज एक सरकारी नौकरी या मासिक वेतन पाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह झारखंड के सुदूर ग्रामीण अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने और राज्य के समग्र विकास को गति देने का एक महा अभियान है.

बदलते परिवेश में हाशिए के समाज को आगे बढ़ाने की चुनौती

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में राज्य की भौगोलिक और सामाजिक वास्तविकताओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि झारखंड एक आदिवासी, दलित और पिछड़ा बहुल राज्य है. ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से इस समुदाय के लोग लंबे समय तक मुख्यधारा की तीव्र प्रतिस्पर्द्धा की गति को पकड़ पाने में सक्षम नहीं हो पाए हैं. नवनियुक्त शिक्षकों को उनकी वास्तविक भूमिका का अहसास कराते हुए सीएम ने कहा कि आप लोग सीधे तौर पर उन बच्चों और परिवारों से जुड़ने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने गांव के अलावा कभी जिला मुख्यालय तक की शक्ल नहीं देखी है. समाज के इस बेहद पिछड़े और वंचित वर्ग को बदलते हुए आधुनिक परिवेश में आगे बढ़ाना और उनके भीतर आत्मविश्वास जगाना ही आपकी सबसे बड़ी चुनौती है. यह जिम्मेदारी अब आपके कंधों पर है.

मानव संसाधन को मजबूत कर विकास के पहिए को गति देने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का मुख्य ध्येय राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में मानव संसाधन (ह्यूमन रिसोर्स) को मजबूत करना है. जब तक विभागों में पर्याप्त और कुशल कार्यबल नहीं होगा. तब तक विकास की योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा जा सकता. शिक्षा और खेल के क्षेत्र में झारखंड की एक ऐतिहासिक और विशिष्ट पहचान रही है. देश का गौरव कहे जाने वाले नेतरहाट विद्यालय का उदाहरण देते हुए सीएम ने कहा कि इसी राज्य की मिट्टी से पढ़कर देश के शीर्ष आईएएस और आईपीएस अधिकारी निकले हैं. इस राज्य में शुरुआत से ही जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत थी. जिसे वर्तमान सरकार पूरी ईमानदारी से अमलीजामा पहना रही है.

दो साल में 16 हजार से अधिक नियुक्तियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2024 के दूसरे महीने (फरवरी) से सरकार ने बड़े पैमाने पर नियुक्तियों का सिलसिला शुरू किया था. पिछले महज चार महीनों के भीतर अकेले शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं. वहीं, पिछले दो वर्षों का लेखा जोखा देखा जाएं, तो सरकार ने 15 से 16 हजार युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं. सीएम ने युवाओं को आश्वस्त किया कि यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है, बल्कि आगामी दो से तीन महीनों के भीतर विभिन्न विभागों में हजारों और नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे युवाओं के सपने साकार होंगे.

कुपोषण के खिलाफ जंग और हुनर को सम्मान

झारखंड की आर्थिक स्थिति और चुनौतियों पर बात करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के 90 से 95 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो किसी बड़े व्यापार या व्यवसाय में सक्षम नहीं हैं. वे पूरी तरह से अपने पारंपरिक हुनर, शारीरिक श्रम और दक्षता के बल पर अपना जीवन यापन करते हैं. ऐसे परिवारों के बच्चों के भीतर खेल और शिक्षा की अपार संभावनाएं छिपी हैं. बस जरूरत उन्हें सही समय पर तराशने की है. राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने श्सीएम उत्कृष्ट विद्यालयश् का निर्माण किया है, जिसके परिणाम अब बेहद सकारात्मक और बेहतर आ रहे हैं. इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य की एक और बड़ी समस्या श्कुपोषणश् का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि झारखंड को कुपोषण के कलंक से बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, और इसमें महिला पर्यवेक्षिकाओं तथा शिक्षकों की भूमिका बेहद अहम होने वाली है.

शिक्षकों को मुख्यमंत्री का मंत्र

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों को एक विशेष और प्रेरणादायक टास्क दिया. उन्होंने अपील की कि हर शिक्षक अपने कार्यकाल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के कम से कम दो ऐसे बच्चों या व्यक्तियों को इस लायक बनाए, ताकि भविष्य में उन्हें आगे बढ़ने से कोई ताकत न रोक सके. उन्होंने कहा कि थोड़े से ईमानदार प्रयास से समाज में बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव संभव है.इसके साथ ही, उन्होंने सुदूर क्षेत्रों में काम करने से कतराने वाले शिक्षकों को कड़ा संदेश भी दिया। सीएम ने कहा कि अक्सर शिक्षा विभाग से यह शिकायतें उनके कानों तक पहुंचती हैं कि शिक्षक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से हिचकिचाते हैं। इस प्रवृत्ति को छोड़ना होगा, क्योंकि असली झारखंड उन्हीं गांवों में बसता है.

पेपर लीक के दौर में झारखंड दे रहा मिसाल

देश की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे देश में युवाओं और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं और नियुक्तियां सालों-साल बाधित हैं। इसके विपरीत, झारखंड सरकार हर एक योग्य युवा को ढूंढ-ढूंढ कर उसके पैरों पर खड़ा करने का प्रयास कर रही है. सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आज राज्य की लगभग 50 लाख महिलाओं को श्मंईयां सम्मान योजनाश् के तहत सीधे आर्थिक सहायता दी जा रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 5 से 10 फीसदी लोग ऐसे भी हैं जो इस योजना का दुरुपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन सरकार उन मुट्ठी भर लोगों की वजह से शेष 95 फीसदी हकदार लोगों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देगी.

मंच से गूंजी शिबू सोरेन के सपनों को साकार करने की हुंकार

मंत्री संजय यादव ने कहा, आज युवाओं के हाथों में जो नियुक्ति पत्र दिख रहा है, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दृढ़ नेतृत्व और विजन के कारण ही संभव हो पाया है.मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान युवाओं को रोजगार और नौकरी देने पर केंद्रित है. आने वाले समय में उनकी अगुआई में और भी बड़े पैमाने पर नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे.

संसदीय कार्यमंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के साथ ही समाज को गढ़ने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी अब शिक्षकों पर आ गई है. वे अपनी इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएं और समाज को आगे बढ़ाने में सरकार के सहभागी बनें. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस तरह झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई में श्दिशोम गुरुश् शिबू सोरेन ने ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, ठीक उसी ईमानदारी और शिद्दत के साथ वर्तमान सरकार इस झारखंड को आगे ले जाने का काम कर रही है. उन्होंने सभी नवनियुक्त कर्मियों से स्वर्गीय शिबू सोरेन के सपनों और हेमंत सोरेन की मेहनत को कामयाब बनाने का आह्वान किया.

 

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