Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सफाई व्यवस्था के टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच अब व्यापक रूप लेती दिख रही है. सीआईडी ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्व निदेशक के कार्यकाल में जारी अन्य टेंडरों की भी फाइलें खंगाली जाएंगी. जांच के दौरान सीआईडी ने छापेमारी में जब्त करीब आधा दर्जन फाइलों की पड़ताल शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ एजेंसियों को निर्धारित पात्रता मानकों और वित्तीय शर्तों को पूरा किए बिना ही ठेके आवंटित किए गए. अब इन तथ्यों के आधार पर अन्य निविदाओं की भी जांच की तैयारी की जा रही है.
तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच के लिए ली जाएगी विशेषज्ञों की भी मदद
सूत्रों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच के लिए विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी. जांच अधिकारियों का फोकस इस बात पर है, कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और पात्रता से जुड़े मानकों में कहीं समझौता तो नहीं किया गया. इधर, सीआईडी जल्द ही टेंडर कमेटी के अन्य सदस्यों के बयान भी दर्ज करेगी. विशेष रूप से यह जांच की जाएगी कि टेंडर की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद दोबारा समय बढ़ाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और अयोग्य मानी जा रही एजेंसियों को कार्यादेश कैसे जारी किए गए.

गौरतलब है कि रिम्स में पूर्ण स्वच्छता, हाउसकीपिंग, नगर कचरा प्रबंधन और बायोमेडिकल वेस्ट हैंडलिंग से जुड़े ठेकों को लेकर पहले भी सवाल उठे थे. पूर्व में सफाई कार्य से जुड़ी एजेंसी अन्नपूर्णा यूटिलिटी सर्विसेज ने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत भेजी थी और मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था. इसी क्रम में सीआईडी ने जांच तेज करते हुए अब पूरे टेंडर सिस्टम की परतें खोलने की तैयारी शुरू कर दी है.
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