पिता के जन्मदिन पर बेटी ने दी सफलता की सौगात, NEET UG 2026 में 596 अंक से बढ़ाया गिरिडीह का मान

Giridih : मेहनत, लगन और मजबूत संकल्प के दम पर गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत ईसरी की रहने वाली आंशिक वर्मा...

Giridih : मेहनत, लगन और मजबूत संकल्प के दम पर गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत ईसरी की रहने वाली आंशिक वर्मा ने NEET UG 2026 परीक्षा में 596 अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे गिरिडीह जिले का नाम रोशन किया है. खास बात यह रही कि NEET का परिणाम उनके पिता राजेश कुमार के जन्मदिन के दिन घोषित हुआ, जिससे यह सफलता परिवार के लिए दोहरी खुशी लेकर आई. बेटी की इस उपलब्धि को परिवार ने पिता के जन्मदिन का सबसे अनमोल और यादगार उपहार बताया.

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार प्रदर्शन से क्षेत्र में खुशी की लहर

आंशिक शिक्षक राजेश कुमार और मधु देवी की पुत्री हैं. उनकी सफलता की खबर मिलते ही ईसरी, पचंबा और आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई. परिजनों, शिक्षकों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की. क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे इलाके के लिए गर्व का क्षण बताया. आंशिक की प्रारंभिक शिक्षा पचंबा से हुई. इसके बाद उन्होंने तारा मॉडर्न पब्लिक स्कूल तथा PAD जैन हाई स्कूल से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की. शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर रहीं आंशिक ने नियमित अध्ययन, अनुशासित दिनचर्या और कठिन परिश्रम को अपनी सफलता का आधार बनाया. उन्होंने कठिन प्रतिस्पर्धा वाली देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा में उल्लेखनीय अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया.

अपनी सफलता पर आंशिक ने कहा

अपनी सफलता पर आंशिक ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार और शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता, पिता और सभी शिक्षकों, परिवार के सदस्यों तथा विशेष रूप से अपने मामा गौतम सोनी को दिया. उन्होंने कहा कि परिवार के विश्वास, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनों के निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने का हौसला दिया. आंशिक का सपना एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी कर एक कुशल, संवेदनशील और जिम्मेदार चिकित्सक बनने का है.

चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है- आंशिक वर्मा

उनका कहना है कि डॉक्टर बनकर वह समाज के गरीब, जरूरतमंद और असहाय लोगों की सेवा करना चाहती हैं. उनका मानना है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है. आंशिक वर्मा की सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनते. यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का साथ मिले तो किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है. उनकी इस उपलब्धि से गिरिडीह जिले के विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि निरंतर प्रयास, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है. आज आंशिक की यह कामयाबी न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गिरिडीह के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है.

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