अवैध वेतन निकासी मामले की जाच कर रही उच्च स्तरीय जांच समिति का दायरा बढ़ा, पूर्व में हजारीबाग और बोकारो की कर रही थी जांच

Ranchi: राज्य सरकार ने अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही आईएएस अभिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय जांच समिति का दायरा बढ़ा दिया है. अब समिति देवघर, रांची, रामगढ़ और चाईबासा ट्रेजरी से हुए कथित वेतन घोटाले की भी जांच करेगी. इससे पहले समिति हजारीबाग और बोकारो जिलों में अवैध वेतन निकासी मामलों की पड़ताल कर रही थी. सरकार के इस फैसले के बाद अब पांच जिलों में हुए भुगतान, दस्तावेजों और वित्तीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जांच होगी. समिति संबंधित अधिकारियों की भूमिका, नियमों के उल्लंघन और सरकारी राशि की अवैध निकासी के पूरे मामले की रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. वित्त विभाग (कोषागार एवं सांख्यिक वित्त निदेशालय) ने बीते 17 अप्रैल को जारी अपने आदेश में बोकारो और हजारीबाग में हुए अवैध निकासी को लेकर आठ सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. वित्त विभाग के मुताबिक, प्रधान महालेखाकार (एजी) झारखंड की रिपोर्ट और संबंधित जिला डीसी की प्राथमिक जांच के देवघर के सारवां स्थित सामुदायक स्वास्थ्य केंद्र, चाईबासा के पुलिस अधीक्षक कार्यालय और रांची के कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनीमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन और रामगढ़ जिला स्थित पशुपालन कार्यालय में वेतन एवं अन्य मद में वृहद पैमाने पर राशि की अवैध निकासी की बात स्वीकारी है. बाते दें कि उपरोक्त मामलों में संबंधित जिलों के डीसी द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी सही पाई गई है, जिसके बाद दोषी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी की जा चुकी हैं
चार जिले में हुए अवैध निकासी की होगी जांच
– चाईबासा: चाईबासा जिला पुलिस से वेतन एवं अन्य मदों में बड़े पैमाने पर अवैध निकासी का मामला उजागर हुआ है.
– देवघर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सारवां (देवघर) से भी वेतन मद में भारी हेराफेरी कर अवैध रूप से पैसे निकाले गए हैं.
– रांची व रामगढ़: रांची के इन्स्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन, कांके तथा जिला पशुपालन कार्यालय, रामगढ़ में भी कोषागार के जरिए अवैध निकासी की पुष्टि हुई है.
समिति इन 8 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित होगी जांच:
– निकासी की प्रक्रिया: कोषागार से अवैध निकासी करने के लिए आखिर कौन सी प्रक्रिया या तरीका अपनाया गया?
– फंड की पहचान: अवैध निकासी मुख्य रूप से किन-किन मदों से की गई?
– दोषियों पर शिकंजा: इस घोटाले के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित करना.
– सॉफ्टवेयर की खामियां: बिल बनाने से लेकर बिल पास होने तक की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर की किन कमियों और त्रुटियों का फायदा उठाकर यह अवैध निकासी संभव हुई?
– बैंकों की भूमिका: इस पूरे खेल में संबंधित बैंकों की भूमिका की विस्तृत जांच करना.
– रिकवरी का प्लान: अवैध रूप से निकाली गई राशि को वापस वसूल कर सरकारी राजकोष में जमा करने के उपायों पर सुझाव देना.
– भविष्य के लिए सुरक्षा: आगे कभी भी इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुधारात्मक तकनीकी और प्रशासनिक उपायों पर ठोस सुझाव देना.
– सरकार के इस कड़े रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. जांच रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.
