84 दिन चला था कारगिल युद्ध, विजय दिवस का 27 वां वर्ष मना रहा है देश

अजय दयाल Ranchi: भारत- पाकिस्तान के इतिहास में सबसे लंबा चलने वाला कारगिल युध्द जो वर्ष 1999 के 03 मई को शुरू...

अजय दयाल

Ranchi: भारत- पाकिस्तान के इतिहास में सबसे लंबा चलने वाला कारगिल युध्द जो वर्ष 1999 के 03 मई को शुरू होकर 26 जुलाई तक 84 दिन चलने के बाद समाप्त हुआ. 26 जुलाई 2026 को कारगिल विजय दिवस का 27 वां वर्ष पूरे देश में मनाया जा रहा है.

कारगिल युद्ध में देश के 527 शहीद और 1300 जवान घायल हुए थे.

कारगिल युद्ध में पूरे देश के 527 शहीद और 1300 जवान घायल हुए थे. इस युद्ध में जेके लाइट एनफेंट्री, ग्रेनिडियर बटालियन, राजपुताना राइफल के जवानों ने हिस्सा लिया था. पूरे युद्ध में बोफोर्स तोप की अहम भूमिका रही. यदि बोफोर्स तोप नहीं होता तो इस युद्ध को जीत पाना मुश्किल था. इस युद्ध में कैप्टन नचिकेता को पाकिस्तानियों ने प्रिजिनर ऑफ वार(पीओडब्ल्यू) बना लिया था. कैप्टन सौरभ कालिया के जहाज को पाकिस्तानियों ने मार गिराया था, घायल कैप्टन कालिया के हरेक अंग को विभत्स तरीके से काटा गया था. सेटेलाइट से लिये कैमरे से यह बात सामने आयी थी.

कारगिल युद्ध में भारत ने सैकड़ों कुर्बानी के बाद जीत का परचम लहराया

कारगिल युद्ध में भारत के अमर शहीदों और जांबाज सिपाहियों ने अपना परचम लहराते हुए जीत हासिल की और कारगिल हिल पर भारत का तिरंगा लहरा दिया. युद्ध समाप्त होने के साथ भारत मां के वीर सपूतों की बहादुरी गाथा दुनिया के मानचित्र पटल पर यूं उभर के आया जैसे पत्थर पर दुभ का उगना. पाकिस्तान के तरफ़ से चलने वाले ऑपरेशन अलबद्र और भारत के तरफ से चलने वाला ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन सफेद सागर और ऑपरेशन तलवार यह बताता है कि देश के किसी कोने से लगाई गयी बदले की आग चौतरफा घेर कर बुझाने के साथ-साथ दफनाने की कला में निपुण कोई देश है उस का नाम है भारत. कारगिल युध्द के हीरो जिनके नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया जिन्हें सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया जैसे परमवीर चक्र महावीर चक्र उनके नाम है स्व कैप्टन सौरभ कालिया , स्व कैप्टन विक्रम बात्रा, स्व कैप्टन मनोज कुमार पांडेय , नायक सुबेदार योगेंद्र सिंह यादव, स्व सुबेदार संजय कुमा, स्व कैप्टन अनुज नैयर, स्व कैप्टन विजयंत , हवलदार सुलतान सिंह नरवरिया, स्व नायक दिगेंद्र कुमार, मेजर डी पी सिंह, स्व मेजर विवेक गुप्ता ये वो भारत मां के लाल हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता. जबकि झारखंड के जांबांज हीरो रामरतन महतो घायल हुए थे, उनके पैर में आज भी स्टील क्रिच लगा हुआ है.

झारखंड के छह सैनानियों ने दी थी सहादत

कारगिल युध्द में देश के सभी प्रांतो के सैनिकों ने हिस्सा लिया था, भला झारखंड कैसे पीछे रह सकता है. 1999 में कारगिल युध्द में शहीद झारखंड के सपूतों में गुमला के तीन जिनमें स्व हवलदार जाॅन अगस्तुस एक्का, स्व हवलदार बिरसा उरांव और स्व हवलदार बिश्राम मुंडा एवं पलामू के दो स्व दिगंबर दीक्षित और प्रमोद कुमार महतो और रांची से स्व नायक सुबेदार नागेश्वर महतो शामिल है.

कारगिल युद्ध के कई हीरो आज भी इस युद्ध की कहानी बताते हुए रोमांचित हो जाते हैं

अभी झारखंड में कारगिल युद्ध के कई हीरो उस युद्ध की कहानी बताते हुए रोमांचित हो जाते हैं. उनमें भूतपूर्व सैनिक संगठन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ झारखंड के अध्यक्ष सुबेदार मकेश कुमार, एमपी सिन्हा,कारपोरल अशोक कुमार झा, नायक सुबेदार रामरतन महतो, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप कुमार झा, सूबेदार एचएन यादव आदि हैं. वायूसेना के पूर्व कारपोरल व कारगिल विजय के हीरो अशोक कुमार झा(एके झा) ने बताया कि कारगिल युद्ध में शहीदों को देखने का भी मौका मिला. शहीदों को देखकर खून खौलता था, लगता था कि हमें भी मौका मिले, हम दुश्मन का सफाया कर तुंरत अपना विजयी तिरंगा लहराये. 26 जुलाई 1999 को हमने विजय पायी, उस दिन पूरे देश ने दिवाली मनायी. एके झा ने बताया कि थल सेना के स्पोर्ट करने के लिए 221 स्क्वाडन हलवारा, लुधियाना में मिग-23 बॉम्बर एयर क्राफ्ट टेकनिशियन के रूप में थे. युद्ध के दौरान हमलोग थल सेना का हर प्रकार से सहायता करने का आदेश था, उसके लिए हमलोगों हमेशा उड़ान भरते थे. तबियत ठीक नहीं रहता था. नाक से खून निकल रहा था. फिर भी युद्ध में शामिल हुए. नायक सुबेदार रामरतन महतो कारगिल युद्ध के हीरो हैं, गोला का स्पिलिंटर ने उनका पैर खराब कर दिया, आज भी उनका एक पैर खराब है. उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने 18 जून 1999 को अकेले 29 दुश्मनों अपने एलएमजी राइफल से मार गिराया था.कारगिल योद्धा ले कर्नल प्रदीप कुमार झा, कारगिल युद्ध के दौरान श्रीनगर में 663 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में पोस्टेड थे. वे उस समय अपनी यूनिट में पाइलट की ड्यूटी करते हुए कई तरह आपरेशन संचालित कर रहे थे. सबसे बड़ा रोमांच यह रहा कि अपनी जान की बाजी लगाकर हेलीाकॉप्टर से उड़ान भरते हुए तोप व गोला के बीच से घायल जवानों को बचा कर लाये थे.

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