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असम-बंगाल में ‘कमल’ की धमक से झारखंड भाजपा चार्ज, गठबंधन के ‘तीरों’ से मचेगा घमासान

Ranchi : असम और बंगाल की जीत ने भाजपा को एक नई ऊर्जा दी है, लेकिन झारखंड की ऊबड़-खाबड़ राजनीतिक जमीन पर...

Ranchi : असम और बंगाल की जीत ने भाजपा को एक नई ऊर्जा दी है, लेकिन झारखंड की ऊबड़-खाबड़ राजनीतिक जमीन पर ‘कमल’ खिलाना इतना आसान नहीं होगा. हेमंत सोरेन के तरकश में सजे क्षेत्रीय मुद्दों और योजनाओं के ‘तीर’ भाजपा के ‘बूस्टर डोज’ का कड़ा इम्तिहान लेने को तैयार हैं. गठबंधन का मानना है कि झारखंड की जमीन पर बाहरी हवा से ज्यादा स्थानीय ‘तीर’ असरदार साबित होंगे. भाजपा के इस मनोवैज्ञानिक दबाव को झेलने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन ने अपनी कमर कस ली है. झामुमो-कांग्रेस का मानना है कि झारखंड की राजनीति के समीकरण बंगाल और असम से बिल्कुल अलग हैं.

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झामुमो के तरकश के वो ‘तीर’, जो भाजपा के लिए बनेंगे चुनौती

झामुमो हमेशा से ‘झारखंडी अस्मिता’ और ‘खतियान’ के मुद्दे पर भाजपा को बाहरी साबित करने की कोशिश करती रही है. ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ और बिजली बिल माफी जैसी योजनाओं को सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मान रही है. 1932 का खतियान और डोमिसाइल यह झामुमो का सबसे अचूक तीर है. स्थानीयता के मुद्दे पर आदिवासियों और मूलवासियों को एकजुट कर गठबंधन भाजपा के ‘हिंदुत्व’ कार्ड को काउंटर करने की कोशिश करेगा.

सरना धर्म कोड

अलग सरना धर्म कोड की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाना और इसे आदिवासियों की पहचान से जोड़ना गठबंधन के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है. आरक्षण की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को अपनी उपलब्धि बताकर गठबंधन पिछड़ी जातियों में अपनी पैठ मजबूत कर रहा है. विक्टिम कार्ड खेलते हुए गठबंधन यह संदेश देने में जुटा है कि केंद्र सरकार आदिवासी मुख्यमंत्री को काम नहीं करने दे रही है.

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असम मॉडल का झारखंड में पदार्पण

असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सफलता के पीछे ‘घुसपैठ’ और ‘जनसांख्यिकी परिवर्तन’ को मुख्य मुद्दा बनाना रहा है. अब भाजपा इसी फॉर्मूले को झारखंड के संथाल परगना में पूरी ताकत से लागू करेगी. बंगाल-असम की जीत ने यह साबित कर दिया है कि ‘माटी’ की सुरक्षा का मुद्दा आदिवासियों और मूलवासियों के बीच गहराई से पैठ बना सकता है.

डबल इंजन’ बनाम ‘भ्रष्टाचार’ का नैरेटिव

बंगाल-असम की जीत को भाजपा ‘सुशासन’ की जीत के रूप में पेश कर रही है. झारखंड में अब भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर घेराबंदी और तीखी होगी. भाजपा अब जनता के बीच यह नैरेटिव सेट करेगी कि अगर विकास की गति तेज करनी है, तो झारखंड को भी पड़ोसी राज्यों की तरह ‘डबल इंजन’ की कतार में आना होगा.

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