दिल्ली में झारखंड के VIP का सफर होगा हाईटेक, दोनों झारखंड भवन के लिए किराए पर ली जाएंगी एसी टैक्सियां

Ranchi: दिल्ली के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में झारखंड के वीआईपी, मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों का सफर अब और भी आरामदायक और...

Ranchi: दिल्ली के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में झारखंड के वीआईपी, मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों का सफर अब और भी आरामदायक और शानदार होने जा रहा है. देश की राजधानी में राज्य सरकार के मेहमानों को वर्ल्ड-क्लास ट्रैवल एक्सपीरियंस देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. नई दिल्ली स्थित झारखंड सरकार के आवासीय आयुक्त कार्यालय ने इसके लिए कमर कस ली है. दिल्ली के दोनों ‘झारखंड भवन’ के लिए चमचमाती एसी टैक्सियों का बेड़ा तैनात करने की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिसके लिए सरकार ने प्रतिष्ठित एजेंसियों से आवेदन मांगे हैं.

दोनों झारखंड भवन को मिलेंगी प्रीमियम गाड़ियां

यह नई व्यवस्था राजधानी के दोनों प्रमुख केंद्रों के लिए होगी. इसमें वसंत विहार स्थित पुराना ‘झारखंड भवन’ और बंगला साहिब रोड पर स्थित ‘न्यू झारखंड भवन’ शामिल हैं. इन दोनों ही भवनों में झारखंड से आने वाले गणमान्य लोगों, मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों का लगातार आना-जाना लगा रहता है. इन्हीं वीआईपी के दौरों को सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए अनुबंध के आधार पर लग्जरी और आरामदायक एसी गाड़ियां ली जा रही हैं. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली आगमन के दौरान राज्य के अधिकारियों और अतिथियों को किसी भी तरह की परिवहन असुविधा का सामना न करना पड़े.

सिर्फ अनुभवी एजेंसियों को ही मिलेगा मौका

चूंकि मामला राज्य के वीआईपी और प्रशासनिक अमले की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा है, इसलिए सरकार ने सर्विस प्रोवाइडर चुनने के लिए बेहद कड़े और प्रीमियम मानक तय किए हैं. इस रेस में केवल वही एजेंसियां शामिल हो सकेंगी जिनके पास फ्लीट ऑपरेशन (गाड़ियों के बेड़े के संचालन) का एक लंबा और बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड है.

सरकारी सेवा का लंबा अनुभव: एजेंसी के पास किसी भी केंद्र या राज्य सरकार के विभाग, पीएसयू या स्वायत्त निकाय में गाड़ियां चलाने का कम से कम 4 वर्षों का ठोस अनुभव होना चाहिए.

दिल्ली के स्टेट भवनों की समझ: सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इस 4 साल के कुल अनुभव में से कम से कम 3 वर्ष का अनुभव दिल्ली में स्थित किसी भी राज्य के भवन में सेवाएं देने का होना चाहिए, ताकि उन्हें यहां के प्रोटोकॉल और कार्यशैली की पूरी समझ हो.

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जून के महीने में पूरी होगी प्रक्रिया, एमएसएमइ को मिलेगी राहत

इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और हाईटेक बनाने के लिए टू-बिड सिस्टम (तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन) का सहारा लिया जा रहा है. जून के महीने में ही इसकी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.

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